हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)
Harita Samhita of Sage Harita with Hindi Commentary
महर्षि हारीत / आत्रेय मुनि द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( १८८ ) हारीतसंहिता । [तृतीयस्थाने- त्तिपथे कण्ठे च शुष्कावृत्तिस्तन्द्रामोहमरोचकभ्रममथ श्लेष्मज्वरे पित्तले ॥ ९० ॥ नींद बहुत आवे, शरीर गुरु रहे,संधि और शिरमें शूल और संधि टूटे और वेग मध्य होवे नेत्रोंमें संताप हो, श्वास हो, सुननेमें रुचिहो और कंठमें सूखापन हो और तंद्रा, मोह,अरोचक, भ्रम, ये भी उपजें, ये सब लक्षण होव तब पित्तकफज्वर जानना ॥ ९० ॥ अथ पित्तकफज्वरका पाचन शुंठचादि क्वाथ । नागरं भद्रमुस्तां वा गुडूच्यामलकाह्वयम् ॥ पाठामृणालोदी- च्याश्च क्वाथः पित्तज्वरे कफे ॥ ९१ ॥ पाचनो दीपनीयः स्याद्रक्तशोषनिवारणः ॥ ९२ ॥ सोंठ, नागरमोथा, गिलोय, आंवला, पाठा, कमलकी डंडी, नेत्रवाला, इनका क्वाथ पित्त- कफज्वरमें हित है ॥ ९१ ॥ और पाचन है, अग्निको जगाता है, रक्तको और शोषको दूर करता है ॥ ९२ ॥ अथ द्राक्षादि क्वाथ । द्राक्षामृतावासकरिष्टकाश्च भूनिम्बतिक्तेन्द्रयवाः पटोलम् ॥ मुस्तासभाग्रां क्वथितः कषायःसश्लेष्मपित्तज्वरनाशनाय ९३॥ मुनक्का, दाख, गिलोय , वांसा, नींबकी छाल, चिरायता, कुटकी, इंद्रयव, परवल, नागर- मोथा, भारंगी इनका क्वाथ पित्तकफज्वरको नाशता है ॥ ९३ ॥ गुडूच्यादि क्वाथ । गुडूचिका निम्बदलानि शुण्ठी मुस्तञ्च कुस्तुम्बुरुचन्दनानि ॥ क्वाथं विदध्यात्कफपित्तवातज्वरं निहन्याच्च गुडूचिकाद्यः॥९४ एष सर्वज्वरान्हन्ति हृल्लासाद्यानरोचकान् ॥ प्रतिश्यायपिपा- साघ्नः शोषदाहनिवारणः ॥ ९५ ॥ गिलोय, नींबके कोंपल, सोंठ, नागरमोथा, धनियां, रक्तचंदन, यह गुडूच्यादि क्वाथ पित्त- कफज्वरको हरता है ॥ ९४ ॥ और यही क्वाथ सब प्रकारके ज्वर, थुकथुकी, अरोचक, जुकाम, पिपासा, शोष, दाहको नाशता है ॥ ९५ ॥ अथ अन्यगुडूच्यादि क्वाथ । गुडूचिकानिम्बकचक्रवासकं शटी किरातं मगधाष्टहल्यौ ॥ दार्वापटोलं क्वथितं कषायं पिबेन्नरः पित्तकफे ज्वरे च ॥९६॥ गिलोय, नींबकी छाल, तगर, बांसा, कचूर, चिरायता, पीपल, अष्टहली, दारुहलदी, परवल, इनके क्वाथको पीवे यह पित्तकफज्वरमें हित है ॥९६ ॥