भारतकोश
हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

Harita Samhita of Sage Harita with Hindi Commentary

महर्षि हारीत / आत्रेय मुनि द्वारा

DevanagariHindipublished548 पृष्ठ

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अ० ३८] भाषाटीकासमेता । (४११) त्यक्त्वा सन्धिस्थमर्मस्थां लूतां चैवहि तद्द्रणम्॥ तदा तप्तेनं तैलेन दाहश्चाशु विधीयते ॥ १६॥ अङ्कोलश्चैव मध्यानि पारिभद्र- दलानि च ॥ गृहधूमं कृष्णजीरं गोमूत्रेण तु पेषितम् ॥ लेपनं च प्रशस्तं च लूतानां मारण परम् ॥ १७ ॥ पिण्डीतकं विड- ङ्गानि तथा चेङ्गुदिमूलकम् ॥ बीजपूरकमूलानि पेषितानि वि- लेपयेत् ॥ गण्डमालां तथा घोरां हन्ति शीघ्रं प्रकण्टकान् ॥ १८॥ स्नुहीक्षीरं चार्कक्षीरं लूतारन्ध्र नियोजयत् ॥ तेन की- टस्तु तन्मध्ये म्रियते नात्र संशयः ॥ १९॥ आस्यतो गिरिक- र्णीञ्च चन्दनञ्च समांशकम् ॥ पिष्ट्वा लेपः प्रयोक्तव्यो लूतां हन्ति सुदारुणाम् ॥ २० ॥ करवीरं चार्कदुग्धं तथा च कटु- तुम्बिकाम् ॥ निशाद्वयं जाङ्गलिकां तिलतैले विपाचयेत् ॥ २१ ॥ लूतामभ्यञ्जने हन्ति गण्डमालाञ्च दारुणाम् ॥ घृतं जात्यादिकं नाम तथा चात्र प्रयोजयेत् ॥ २२ ॥ अन्यान्यपि व्रणे यानि प्रोक्तानि च यथाविधि ॥ २३ ॥ इत्यात्रेयभाषिते हारीतोत्तरे तृतीयस्थाने लूतागण्डमालाचिकित्सा नामाष्ट- त्रिंशोऽध्यायः ॥ ३८ ॥ हे पुत्र! उसके इलाजको कहते हैं सुनो, रोहिणी, विशदा, विजया, विमेदिनी ॥४॥ कान्तारी, वज्र-- पुष्पा, इन्द्रायुधा, ऐसे सात प्रकारकी लूत होती हैं सो हे पुत्र ! जुदी जुदी सुनो॥ ५॥ रक्तमुखवाली,. रक्तवर्णवाली, रक्तके स्थानमें होनेवाली ऐसी रोहिणी नामक लूत होती है और सफेद वर्णवाली तथा दीर्घ ऐसी विशदानामवाली लूत मांसस्थानमें होती है ॥ ६ ॥ विजयानामवाली लूत पीलेवर्णवाली और शिरके मध्यमें होती है और जवसरीखी होती है ॥ ७ ॥ सफेदवर्णवाली नीलीरेखावाली ऐसी लूत मेदके स्थानमें मेदिनीनामवाली होती है ॥ ८ ॥ सफेदवर्णवाली रक्तमुखवाली ऐसी कांतारीनामवाली लूत बस्तिस्थानमें होतीहै और वज्रपुष्पा नामक लूत अस्थि- स्थानमें होती है और सफ़ेदवर्णवाली तथा काले मुखवाली होती है ॥ ९ ॥ इंद्रायुधा लूत नसोंके मध्यमें होती है धूम्रवर्णवाली और काले शिरवाली होती है ॥ १० ॥ रोहिणी- नामवाली लूत अंगुल प्रमाणमें होती है विशदालूत सूतके समान होती है, विजया लूत जबके आकारवाली अथवा गोल आकारवाली होती है ॥ ११ ॥ अन्य लूत मनुष्योंके चौलाईके कांटेके समान जाननी और रोहिणी विजया विशदा लूत मांसस्थानके