भारतकोश
हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

Harita Samhita of Sage Harita with Hindi Commentary

महर्षि हारीत / आत्रेय मुनि द्वारा

DevanagariHindipublished548 पृष्ठ

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बारहमें दिन मंगलाचरण करवाके पीछे स्त्रियोंका (अर्थात् मंगलादिकके) दर्शन करवावे ॥ ५ ॥ जातककर्ममें सुतकी उत्पत्ति होनेका मंगल करवावे पीछे बारहमें दिन मंगल करवाके नामकर्म करवावे पीछे कर्णवेधकर्म करवावे ॥ ६ ॥ फिर वस्त्रबन्ध, तागड़ी आदि बांधनेका कर्म और विवाह- कर्म ये सब कर्म बालकके करवाने चाहिये ॥ ७ ॥ इति वेरोनि०दितहारीतसंहिताभाषाटीकायां तृतीयस्थाने सूतिकोपचारो नाम त्रिपंचाशत्तमोऽध्यायः ॥ ५३ ॥ चतुःपञ्चाशत्तमोऽध्यायः ५४. अथ बालरोगनिदानलक्षणम् । आत्रेय उवाच ॥ पञ्चैव क्षीरदोषाश्च स्त्रीणाञ्च कथिता बुधैः॥ घनक्षीरोष्णक्षीराम्लक्षीरा चैव तथा परा ॥ १ ॥ अल्पक्षीरा क्षारक्षीरा मृदुक्षीरा तथा परा ॥ मृदुक्षीरा भवेत्सौख्या पञ्चान्या दोषकारकाः ॥ २ ॥ घनाध्माननिरोधत्वं श्वासकासादिस- म्भवः ॥ उत्फुल्लकुक्षितैवं हि घनक्षीरस्य सेवनात् ॥ ३ ॥ अल्पसत्त्वः कृशो दीनः श्वासातीसारपीडितः॥ अल्पक्षीरस्य दोषेण सम्भवेदृतवाक्सुतः ॥ ४ ॥ ज्वरः शोषस्तथाल्पत्व- मुष्णक्षीरेण बालके ॥ तथैव चोष्णक्षीरेण ज्वरातीसार एव च ॥ ॥ ५ ॥ सुसत्त्वं बलमाप्नोति चारोग्यं लभते शिशुः ॥ मृदुक्षीरेण नियतं जायते रूपवानपि ॥ ६ ॥ चक्षूरोगश्च कण्डूश्च क्षतश्लेष्मा- वस्राविता ॥ संक्लेद्युक्तं नासास्यं जायते क्षारदुग्धके ॥ ७ ॥ पण्डितजनोंने स्त्रियोंके दूधके दोष पांच कहे हैं गाढा दूध, गरम दूध, खट्टा दूध, ॥ १ ॥ थोड़ा दूध, खारा दूध, ये पांच दोष हैं और कोमल, स्वच्छ दूधवाली स्त्री सुखसे युक्त कही और ये अन्य सब दूषित दूधवाली हैं ॥ २ ॥ जो बालक गाढा दूध पीवे तो करड़ा अफारा हो, श्वास रोग हो, खांसी हो और कूखि, जांघोंकी संधि ये फूली हुई रहे ॥ ३ ॥ और अल्प दूधके पीनेसे थोड़ा बल हो, कृश हो, दीन हो, श्वास, अतिसार, इन्होंने पीड़ित हो और वाणी नष्ट हो जावे ॥ ४ ॥ ज्वर हो अल्पशोष हो अतिसार हो ये स्त्रीका गरम दूध पीनेवाले बालकके रोग हो जाते हैं ॥ ५ ॥ और कोमल स्वच्छ दूध पीनेसे बालक मोटा होता है और बल बढता है, निरन्तर आरोग्य सुखमें प्राप्त रहता है और रूपवान् होता है ॥ ६ ॥ आंखोंमें रोग हो, खाजि हो, गुमड़े, फुंसी