भारतकोश
हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

Harita Samhita of Sage Harita with Hindi Commentary

महर्षि हारीत / आत्रेय मुनि द्वारा

DevanagariHindipublished548 पृष्ठ

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पृष्ठ 492

( ४६० ) हारीतसंहिता । [ तृतीयस्थाने- नागरीमभयादन्तीगुडचूर्णं प्रदापयेत् ॥ बालानां विद्रधिश्चैव नाशयेच्च न संशयः ॥ १८ ॥ पाठाबिल्वशिलादीनि वत्सकं शाल्मलीत्वचम्॥दुग्धेन पानं बालानामतिसारनिवारणम् १९ अर्जुनञ्च कदम्बञ्च कुष्ठं गैरिकमेव च ॥ लेपनं त्वचि दोषाणां वारणं बालक्रस्य च॥२०॥ रोध्रं रसाञ्जनं धात्री गैरिकं मधुना युतम् ॥ अञ्जनं चैव बालानां नेत्ररोगनिवारणम् ॥ २१ ॥ पित्तपापडाके क्वाथमें खांड और शहद मिलाके देना हित है और बालकोंके ज्वरके नाशकेवास्ते चिरायता, शहद इनका पिलाना हित है ॥ १४ ॥ और भारंगी, रास्ना, काकड़ासींगी इनके चूर्णमें शहद मिला लेह बना चटानेसे बालकका श्वास, खांसी इनका नाश होता है ॥ १५ ॥ हरड़ै, वच, सूंठ, नागरमोथा, काकड़ासींगी, इनका चूर्ण बना बराबरका गुड़ मिला देनेसे बालकोंकी खांसीका नाश होता है ॥ १६ ॥ टेसू, त्रिफला, खीर, शतावरी, पीपली, इनको चावलोंके धोवनेके जलमें पीस प्यानेसे बालमूत्र- रोध दूर होता है ॥ १७ ॥ सूंठ, हरडै, जमालघोटेकी जड़, इनके चूर्णमें गुड़ मिलाके देनेसे बालकोंके विद्रधीरोगका नाश होता है ॥ १८ ॥ पाठा, बेलगिरी, शिलाजीत, कुड़ाकी छाल, सेमलकी छाल इनको पीसि दूधके संग प्यानेसे बालकोंके अतिसारका नाश होता है ॥ १९ ॥ अर्जुनवृक्ष, कदंव, कूठ, गेरू, इनको शहदमें मिला अंजन करनेसे बालकोंके नेत्ररोगका नाश होता होता है ॥ २० ॥ लोध, रसांजन, आमला, गेरू इनको शहदके संग पीसकर अंजन करनेसे बालकोंके नेत्रका रोग नष्ट होता है ॥ २१ ॥ अथ बालकोंकी बुद्धिको बढानेवाले औषध । वचा ब्राह्मी च मण्डूकी घनकुष्ठं सनागरम् ॥ घृतेन प्रातर्देयञ्च बालानां पुष्टिकारकम् ॥ २२ ॥ गुडूचिकापामार्गश्च विडङ्गं शंखपुष्पिका॥विष्णुकान्ता वचा पथ्या नागरश्च शतावरी ॥ ॥२३॥चूर्णं घृतेन संमिश्रं लिहतो धीः प्रवर्त्तते ॥ त्रिभिर्दिनैः सहस्रकं श्लोकानामवधारयेत् ॥ २४ ॥ वच, ब्राह्मी, सूर्यफूलवेल, नागरमोथा, कूठ, इनको घृतमें मिला प्रातःकाल देनेसे बाल- कोंकी पुष्टि होती है ॥ २२ ॥ गिलोय, ऊंगा, वायविडिंग, शंखपुष्पी, विष्णुक्रांता, वच, हरडै, सूंठ, शतावरी ॥ २३ ॥ इनके चूर्णको घृतमें मिला चटानेसे बालककी बुद्धि बढती है । तीन दिनमें हजार श्लोकोंको धारण कर सकता है ॥ २४ ॥