भारतकोश
हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

हारीत संहिता (महर्षि आत्रेय-हारीत मुनि संवाद - सम्पूर्ण ६ स्थान सटीक)

Harita Samhita of Sage Harita with Hindi Commentary

महर्षि हारीत / आत्रेय मुनि द्वारा

DevanagariHindipublished548 पृष्ठ

पृष्ठ 60, कुल 548 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 60

( २६ ) हारीतसंहिता । [ प्रथमस्थाने- पचीस वर्षसे लेकर पचास वर्षतक पुरुषत्व बना रहता है और इतने ही में स्त्री भी क्रियामें कठोर रहती है इसलिये यह उत्तम आयु देखी जाती है । सत्ताईस वर्षसे लेकर पचास वर्ष तक जिसके लड़के हों यह उत्तम वय है ॥ ७ ॥ ८ ॥ स्थूलोऽतिदीर्घकठिनस्तथा स्त्री बृहदौदरा ॥ इत्युत्तमोऽवयववाञ्ज्ञातव्यश्चोत्तमोत्तमः ॥ ९ ॥ जो स्थूल,अतिलंबा और कठोर, ऐसा पुरुष हो और बड़े पेटवाली स्त्री हो तो समझना यह उत्तम शरीरवाला और उत्तमोत्तम मनुष्य है॥ ९ ॥ षष्ट्यूर्ध्वमशीतिसमाः प्राप्तं हीनबलं वयः ॥ तदूर्द्धं हीनहीनश्च विज्ञेयो वयसः क्रमः॥ १० ॥ साठ वर्षसे उपरांत अस्सी वर्षतक हीनबल अवस्था होती है और अस्सीवर्षसे उपरांत हीनसे भी हीन अवस्था होती है ऐसे अवस्थाका क्रम जानना चाहिये ॥ १० ॥ क्षीणोऽध्वश्रान्तसंखिन्नस्तथा रोगानुपीडितः॥ रूक्षश्चातिकृशो ज्ञेयो बालसात्म्यमुदाहृतम् ॥११॥ क्षीण मार्गमें थकनेसे खेदको प्राप्त और रोगसे पीडित, रूखा अति कृश मनुष्य बालककी प्रकृतिके समान प्रकृतिवाले होते हैं ॥ ११ ॥ सुकुमारोऽतिभीरुश्च मध्यकायस्त्रियोऽपि वा ॥ मध्यसात्म्योऽपि विज्ञेयो मध्यमो वयसात्म्यकः ॥१२॥ कोमल शरीरवाला, अति डरनेवाला, मध्यम शरीरवाला, स्त्री-मध्य प्रकृतिवाला ऐसा मनुष्य मध्य अवस्थाकी प्रकृतिवाला जानना ॥ १२ ॥ पञ्चवर्षा स्मृता बाला मुग्धा च षट्समावधिम् ॥ द्वादशाब्दं स्मृता बाला मुग्धा स्यात्सप्तमावधिम् ॥ १३ ॥ प्रौढा च नव- वर्षाणिप्रगल्भा चत्रयोदश॥चतुर्विंशद्वर्षादूर्द्धं सप्तत्रिंशतिमध्य- गाः ॥ पूर्ण वयः स्त्रियः प्राप्ता इत्येतदुत्तमं वयः ॥ १४ ॥ पांच वर्षकी स्त्री बालक कहाती है, पांचसे आगे छः वर्षतककी स्त्री मुग्धा कहाती है, बारह वर्षकी स्त्री बाला कहाती है और बारह वर्षके आगे सात वर्षतक स्त्री मुग्धा कहाती है ॥१३॥ तिसके पीछे नव वर्षतक स्त्री प्रौढा कहाती है और तिसके पीछे तेरह वर्षतककी स्त्री प्रगल्भा कहाती है. और इतने वयके बीचमें ही चौबीस वर्षसे उपरांत सैंतीस वर्षतक मध्य अवस्थाकी स्त्री पूर्ण अवस्थाको प्राप्त होती है.यह उन्होंकी उत्तम अवस्था है ॥ १४ ॥ Nepal Sanskrit University, Balmeeki Campus, Kathmandu