विस्तृत हरिवंश पुराण (हरिवंशपर्व, विष्णुपर्व व भविष्यपर्व सहित)
Harivamsha Purana Hindi
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Harivamsha Purana Complete (Mahabharata Supplement) (उद्गम)
पृष्ठ 1036, कुल 1169 में से
संदर्भ में पढ़ें| १०१० | श्रीमन्महाभारते खिलभागे | [ हरिवंशे |
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आप अमूर्त देवता तथा पिनाकधारी हैं; आपको नमस्कार है। आप कुञ्ज, कूपमें निवास करनेवाले और कल्याणस्वरूप शिव हैं, आपको नमस्कार है ॥ १५ ॥
नमस्तुष्टाय तुण्डाय नमस्तुट्टिटुटाय च ।
नमः शिवाय शान्ताय गिरिशाय च ते नमः॥ १६ ॥
आप संतुष्ट रहनेवाले, मुखस्वरूप तथा दुष्टोंकी हिंसा करनेवाले हैं, आपको नमस्कार है। आप पर्वतपर शयन करनेवाले शान्तस्वरूप शिव हैं, आपको बारंबार नमस्कार है ॥ १६ ॥
नमो हराय हिप्राय नमो हरिहराय च ।
नमोऽघोराय घोराय घोराघोरप्रियाय च ॥ १७ ॥
आप हर, हिप्र ( रेचक एवं पूकरूप ) तथा हरिहर-स्वरूप हैं, आपको नमस्कार है ! नमस्कार है !! आप अघोर, घोर तथा घोराघोरप्रिय हैं, आपको नमस्कार है ॥ १७ ॥
नमोऽघण्टाय घण्टाय नमो घटिघटाय च ।
नमः शिवाय शान्ताय गिरिशाय च ते नमः ॥ १८ ॥
आप घण्टारहित, घण्टायुक्त तथा घटिघट ( घड़ेके भी घड़ा ) हैं, आपको बारंबार नमस्कार है। आप पर्वतपर शयन करनेवाले शान्तस्वरूप शिव हैं, आपको बारंबार नमस्कार है ॥ १८ ॥
नमो विरूपरूपाय पुराय पुरहारिणे ।
नम आद्याय बीजाय शुचयेऽष्टस्वरूपिणे ॥ १९ ॥
आप विरूप रूप धारण करनेवाले हैं, क्षेत्रस्वरूप तथा असुरोंके तीनों पुरोंका नाश करनेवाले हैं, आपको नमस्कार है। आप सबके आदि-बीज, परम पवित्र तथा अष्टमूर्तिधारी हैं, आपको नमस्कार है ॥ १९ ॥
नमः पिनाकहस्ताय नमः शूलासिधारिणे ।
नमः खट्वाङ्गहस्ताय नमस्ते कृत्तिवाससे ॥ २० ॥
आपके हाथमें पिनाक शोभा पाता है, आपको नमस्कार है। आप शूल और खङ्ग धारण करनेवाले हैं, आपको नमस्कार है। आप अपने हाथमें खट्वाङ्ग धारण करते हैं, आपको नमस्कार है। आप गजासुरके चर्मको वस्त्रके रूपमे ओढ़ते हैं, आपको नमस्कार है ॥ २० ॥
नमस्ते देवदेवाय नम आकाशमूर्तये ।
हराय हरिरूपाय नमस्ते तिग्मतेजसे ॥ २१ ॥
देवताओंके भी देवता आपको नमस्कार है। आकाश-स्वरूप आपको नमस्कार है। हरिरूपधारी आप भगवान् हरको नमस्कार है। प्रचण्ड तेजवाले सूर्यतुल्य आपको नमस्कार है ॥ २१ ॥
भक्तप्रियाय भक्ताय भक्तानां वरदायिने ।
नमोऽभ्रमूर्तये देव जगन्मूर्तिधराय च ॥ २२ ॥
आप भक्तोंके प्रिय, स्वयं भी श्रीहरिके भक्त तथा भक्तोंको वर देनेवाले हैं। देव ! आप मेघस्वरूप हैं तथा विश्वरूप धारण करनेवाले हैं, आपको नमस्कार है ॥ २२ ॥
नमश्चन्द्राय देवाय सूर्याय च नमो नमः।
नमः प्रधानदेवाय भूतानां पतये नमः ॥ २३ ॥
आप चन्द्रदेवको नमस्कार है। आप सूर्यदेवको भी बारंबार नमस्कार है। आप प्रधान देवता तथा सम्पूर्ण भूतोंके अधिपति हैं, आपको बारंबार नमस्कार है ॥ २३ ॥
करालाय च मुण्डाय विकृताय कपर्दिने ।
अजाय च नमस्तुभ्यं भूतभावनभावन ॥ २४ ॥
आप विकराल रूपधारी, मूँड़ मुँड़ाये हुए संन्यासी, विकृतस्वरूप तथा जटा-जूटधारी हैं। भूतभावनभावन ! आप अजन्मा हैं, आपको नमस्कार है ॥ २४ ॥
नमोऽस्तु हरिकेशाय पिङ्गलाय नमो नमः।
नमस्तेऽभीपुहस्ताय भीरुभीरुहराय च ॥ २५ ॥
सूर्यकी किरणें आपके केश हैं, आपको नमस्कार है। आपकी अङ्गकान्ति पिङ्गलवर्णकी है, आपको बारंबार नमस्कार है। आप ही मुझ श्रीकृष्णके रूपमें पार्थके सारथि बनकर हाथमें चाबुक लिये रहते हैं। आप भीरु-से-भीरु ( अत्यन्त भयभीत ) तथा हर ( महान् संहारकारी ) हैं, आपको नमस्कार है ॥ २५ ॥
हराय भीतिरूपाय घोराणां भीतिदायिने ।
नमो दक्षमखघ्नाय भग्ननेत्रापहारिणे ॥ २६ ॥
आप भीतिस्वरूप हर तथा भयंकर दैत्योंको भय देनेवाले हैं, दक्षके यज्ञका विध्वंस तथा भग देवताके नेत्रका अपहरण करनेवाले हैं, आपको नमस्कार है ॥ २६ ॥
उमापते नमस्तुभ्यं कैलासनिलयाय च।
आदिदेवाय देवाय भवाय भवरूपिणे ॥ २७ ॥
उमापते ! आप कैलासवासी, आदि देवता, देवमय, जगत्स्वरूप तथा भवनामसे प्रसिद्ध हैं, आपको नमस्कार है ॥
नमः कपालहस्ताय नमोऽजमथनाय च ।
त्र्यम्बकाय नमस्तुभ्यं त्र्यक्षाय च शिवाय च॥ २८ ॥
आप हाथमें कपाल धारण करते हैं, आपको नमस्कार है। आपने ब्रह्माजीके सिरको मथ डाला है, आपको नमस्कार है। आप त्रिनेत्रधारी होनेके कारण त्र्यम्बक और त्र्यक्ष कहलाते हैं, आप भगवान् शिवको नमस्कार है ॥
वरदाय वरेण्याय नमस्ते चन्द्रशेखर ।
नम इध्माय हविषे ध्रुवाय च कुशाय च ॥ २९ ॥
चन्द्रशेखर ! आप वरदायक एवं वरणीय देवताको नमस्कार है, आप ही समिधा, हविष्य, ध्रुव एवं कुशरूप हैं, आपको नमस्कार है ॥ २९ ॥