भारतकोश
विस्तृत हरिवंश पुराण (हरिवंशपर्व, विष्णुपर्व व भविष्यपर्व सहित)

विस्तृत हरिवंश पुराण (हरिवंशपर्व, विष्णुपर्व व भविष्यपर्व सहित)

Harivamsha Purana Hindi

महर्षि वेदव्यास द्वारा

स्रोत: Harivamsha Purana Complete (Mahabharata Supplement) (उद्गम)

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पृष्ठ 1161
११३४संतानगोपालविधौ

गोपकुमार गोविन्द ! रमावल्लभ वासुदेव ! जगन्नाथ ! मुझे पुत्र दीजिये, सम्पत्ति दीजिये ॥ २७ ॥

मद्वाञ्छितफलं देहि देवकीनन्दनाच्युत ।
मम पुत्रार्थितं धन्यं कुरुष्व यदुनन्दन ॥ २८ ॥
देवकीनन्दन ! अच्युत ! मुझे मनोवाञ्छित फल (पुत्र) दीजिये। यदुनन्दन ! मेरी पुत्रविषयक प्रार्थनाको सफल एवं धन्य कीजिये ॥ २८ ॥

याचेऽहं त्वां श्रियं पुत्रं देहि मे पुत्रसम्पदम् ।
भक्तचिन्तामणे राम कल्पवृक्ष महाप्रभो ॥ २९ ॥
भक्तोंके लिये चिन्तामणिस্বরূপ राम ! भक्तवाञ्छाकल्प-तरो ! महाप्रभो ! मैं आपसे धन और पुत्रकी याचना करता हूँ। मुझे पुत्र और धन-सम्पत्ति दीजिये ॥ २९ ॥

आत्मजं नन्दनं पुत्रं कुमारं डिम्भकं सुतम् ।
अर्भकं तनयं देहि सदा मे रघुनन्दन ॥ ३० ॥
रघुनन्दन ! आप सदा मुझे आनन्ददायक आत्मज, पुत्र, कुमार, डिम्भक (बालक), सुत, अर्भक (बच्चा) एवं तनय (बेटा) दीजिये ॥ ३० ॥

वन्दे संतानगोपालं माधवं भक्तकामदम् ।
अस्माकं पुत्रसंप्राप्त्यै सदा गोविन्दमच्युतम् ॥ ३१ ॥
मैं अपने लिये पुत्रकी प्राप्तिके उद्देश्यसे संतानप्रद गोपाल, माधव, भक्तोंका मनोरथ पूर्ण करनेवाले अच्युत गोविन्दकी वन्दना करता हूँ ॥ ३१ ॥

ॐकारयुक्तं गोपालं श्रीयुक्तं यदुनन्दनम् ।
क्लींयुक्तं देवकीपुत्रं नमामि यदुनायकम् ॥ ३२ ॥
ॐकारयुक्त गोपाल, श्रीयुक्त यदुनन्दन तथा क्लींयुक्त देवकीपुत्र यदुनाथको मैं प्रणाम करता हूँ (अर्थात् 'ॐ श्रीं क्लीं' इन तीनों बीजोंसे युक्त 'देवकीसुत गोविन्द...' इत्यादि मन्त्रका मैं आश्रय लेता हूँ) ॥ ३२ ॥

वासुदेव मुकुन्देश गोविन्द माधवाच्युत ।
देहि मे तनयं कृष्ण रमानाथ महाप्रभो ॥ ३३ ॥
वासुदेव ! मुकुन्द ! ईश्वर ! गोविन्द ! माधव ! अच्युत ! श्रीकृष्ण ! रमानाथ ! महाप्रभो ! मुझे पुत्र दीजिये ॥ ३३ ॥

राजीवनेत्र गोविन्द कपिलाक्ष हरे प्रभो ।
समस्तकाम्यवरद देहि मे तनयं सदा ॥ ३४ ॥
राजीवनयन (कमल-सदृश नेत्रवाले) ! गोविन्द ! कपिलाक्ष ! हरे ! प्रभो ! सम्पूर्ण कमनीय मनोरथोंकी सिद्धिके लिये वर देनेवाले श्रीकृष्ण ! मुझे सदाके लिये पुत्र दीजिये ॥

अब्जपद्मनिभं पद्मवृन्दरूप जगत्पते ।
देहि मे वरसत्पुत्रं रमानायक माधव ॥ ३५ ॥
नीलकमलसमूहके समान श्यामसुन्दर रूपवाले जगन्नाथ ! रमानायक ! माधव ! मुझे जलज कमलके सदृश मनोहर एवं श्रेष्ठ सत्पुत्र प्रदान कीजिये ॥ ३५ ॥

नन्दपाल धरापाल गोविन्द यदुनन्दन ।
देहि मे तनयं कृष्ण रुक्मिणीवल्लभ प्रभो ॥ ३६ ॥
अजगर और वरुणके दूतोंसे नन्दजीकी रक्षा करनेवाले ! पृथ्वीपालक ! यदुनन्दन ! गोविन्द ! प्रभो ! रुक्मिणीवल्लभ श्रीकृष्ण ! मुझे पुत्र प्रदान कीजिये ॥ ३६ ॥

दासमन्दार गोविन्द मुकुन्द माधवाच्युत ।
गोपाल पुण्डरीकाक्ष देहि मे तनयं श्रियम् ॥ ३७ ॥
अपने सेवकोंकी इच्छा पूर्ण करनेके लिये कल्पवृक्ष-स्वरूप ! गोविन्द ! मुकुन्द ! माधव ! अच्युत ! गोपाल ! पुण्डरीकाक्ष (कमलनयन) ! मुझे संतान और सम्पत्ति दीजिये ॥ ३७ ॥

यदुनायक पद्मेश नन्दगोपवधूसुत ।
देहि मे तनयं कृष्ण श्रीधर प्राणनायक ॥ ३८ ॥
यदुनायक ! लक्ष्मीपते ! यशोदानन्दन ! श्रीधर ! प्राणवल्लभ ! श्रीकृष्ण ! मुझे पुत्र प्रदान कीजिये ॥ ३८ ॥

अस्माकं वाञ्छितं देहि देहि पुत्रं रमापते ।
भगवन् कृष्ण सर्वेश वासुदेव जगत्पते ॥ ३९ ॥
रमापते ! भगवन् ! सर्वेश्वर ! वासुदेव ! जगत्पते ! श्रीकृष्ण ! हमें मनोवाञ्छित वस्तु दीजिये । पुत्र प्रदान कीजिये ॥ ३९ ॥

रमाहृदयसम्भार सत्यभामामनःप्रिय ।
देहि मे तनयं कृष्ण रुक्मिणीवल्लभ प्रभो ॥ ४० ॥
रमा (लक्ष्मी) को अपने वक्षःस्थलमें धारण करनेवाले ! सत्यभामाके हृदयवल्लभ ! तथा रुक्मिणीके प्राणनाथ ! प्रभो ! मुझे पुत्र दीजिये ॥ ४० ॥