भारतकोश
विस्तृत हरिवंश पुराण (हरिवंशपर्व, विष्णुपर्व व भविष्यपर्व सहित)

विस्तृत हरिवंश पुराण (हरिवंशपर्व, विष्णुपर्व व भविष्यपर्व सहित)

Harivamsha Purana Hindi

महर्षि वेदव्यास द्वारा

स्रोत: Harivamsha Purana Complete (Mahabharata Supplement) (उद्गम)

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पृष्ठ 1163
११३६संतानगोपालविधौ

वासुदेव ! जगन्नाथ ! श्रीपते ! पुरुषोत्तम ! देवेन्द्रपूजित श्रीकृष्ण ! मुझे पुत्र-दान दीजिये ॥ ५४ ॥

कुरु मां पुत्रदत्तं च यशोदाप्रियनन्दन ।
मह्यं च पुत्रसंतानं दातव्यं भवता हरे ॥ ५५ ॥
यशोदाके प्रिय नन्दन ! मुझे पुत्र प्रदान कीजिये । हरे ! आपको मुझे पुत्ररूप संतानका दान अवश्य करना चाहिये ॥ ५५ ॥

वासुदेव जगन्नाथ गोविन्द देवकीसुत ।
देहि मे तनयं राम कौसल्याप्रियनन्दन ॥ ५६ ॥
वासुदेव ! जगन्नाथ ! गोविन्द ! देवकीकुमार ! कौशल्याके प्रिय पुत्र राम ! मुझे पुत्र प्रदान कीजिये ॥ ५६ ॥

पद्मपत्राक्ष गोविन्द विष्णो वामन माधव ।
देहि मे तनयं सीताप्राणनायक राघव ॥ ५७ ॥
कमलदललोचन ! गोविन्द ! विष्णो ! वामन ! माधव ! सीताके प्राणवल्लभ ! रघुनन्दन ! मुझे पुत्र दीजिये ॥ ५७ ॥

कञ्जाक्ष कृष्ण देवेन्द्रमण्डित मुनिवन्दित ।
लक्ष्मणाग्रज श्रीराम देहि मे तनयं सदा ॥ ५८ ॥
कमलनयन श्रीकृष्ण ! देवराजसे अलंकृत एवं पूजित हरे ! लक्ष्मणके बड़े भैया मुनिवन्दित श्रीराम ! मुझे सदाके लिये पुत्र प्रदान कीजिये ॥ ५८ ॥

देहि मे तनयं राम दशरथप्रियनन्दन ।
सीतानायक कञ्जाक्ष मुचुकुन्दवरप्रद ॥ ५९ ॥
दशरथके प्रिय नन्दन श्रीराम ! सीतापते ! कमलनयन ! मुचुकुन्दको वर देनेवाले श्रीकृष्ण ! मुझे पुत्र दीजिये ॥ ५९ ॥

विभीषणस्य या लङ्का प्रदत्ता भवता पुरा ।
अस्माकं तत्प्रकारेण तनयं देहि माधव ॥ ६० ॥
माधव ! आपने पूर्वकालमें जो विभीषणको लङ्काका राज्य दिया था, उसी प्रकार हमें पुत्र दीजिये ॥ ६० ॥

भवदीयपदाम्भोजे चिन्तयामि निरन्तरम् ।
देहि मे तनयं सीताप्राणवल्लभ राघव ॥ ६१ ॥
सीताके प्राणवल्लभ रघुनन्दन ! मैं आपके चरणारविन्दोंका निरन्तर चिन्तन करता हूँ, मुझे पुत्र प्रदान कीजिये ॥

राम मत्कार्यवरद पुत्रोत्पत्तिफलप्रद ।
देहि मे तनयं श्रीश कमलासनवन्दित ॥ ३२ ॥
मुझे मनोवाञ्छित वर और पुत्रोत्पत्तिरूप फल देनेवाले श्रीराम ! ब्रह्माजीके द्वारा वन्दित लक्ष्मीपते ! आप मुझे पुत्र दीजिये ॥ ६२ ॥


राम राघव सीतेश लक्ष्मणाsub/नुज देहि मे ।
भाग्यवत्पुत्रसंतानं दशरथात्मज श्रीपते ॥ ६३ ॥
लक्ष्मणके बड़े भाई ! सीताके प्राणवल्लभ ! दशरथकुमार ! रघुकुलनन्दन ! श्रीराम ! श्रीपते ! आप मुझे भाग्यशाली पुत्ररूप संतान दीजिये ॥ ६३ ॥

देवकीगर्भसंजात यशोदाप्रियनन्दन ।
देहि मे तनयं राम कृष्ण गोपाल माधव ॥ ६४ ॥
देवकीके गर्भसे उत्पन्न हुए यशोदाके लाड़ले लाल ! गोपाल कृष्ण ! राम ! माधव ! मुझे पुत्र दीजिये ॥ ६४ ॥

कृष्ण माधव गोविन्द वामनाच्युत शङ्कर ।
देहि मे तनयं श्रीश गोपबालकनायक ॥ ६५ ॥
माधव ! गोविन्द ! वामन ! अच्युत ! कल्याणकारी श्रीपते ! गोपबालकनायक ! श्रीकृष्ण ! मुझे पुत्र दीजिये ॥ ६५ ॥

गोपवाल महाधन्य गोविन्दाच्युत माधव ।
देहि मे तनयं कृष्ण वासुदेव जगत्पते ॥ ६६ ॥
गोपकुमार ! सबसे बढ़कर धन्य ! गोविन्द ! अच्युत ! माधव ! वासुदेव ! जगत्पते ! श्रीकृष्ण ! मुझे पुत्र प्रदान कीजिये ॥ ६६ ॥

दिशतु दिशतु पुत्रं देवकीनन्दनोऽयं
दिशतु दिशतु शीघ्रं भाग्यवत्पुत्रलाभम् ।
दिशतु दिशतु श्रीशो राघवो रामचन्द्रो
दिशतु दिशतु पुत्रं वंशविस्तारहेतोः ॥ ६७ ॥
ये भगवान् देवकीनन्दन मुझे पुत्र दें, पुत्र दें । शीघ्र ही भाग्यवान् पुत्रकी प्राप्ति करावें । श्रीसीताके स्वामी ! रघुकुलनन्दन श्रीरामचन्द्र ! मेरे वंशके विस्तारके लिये मुझे पुत्र प्रदान करें, पुत्र प्रदान करें ॥ ६७ ॥

दीयतां वासुदेवेन तनयो मत्प्रियः सुतः ।
कुमारो नन्दनः सीतानायकेन सदा मम ॥ ६८ ॥
वसुदेवनन्दन भगवान् श्रीकृष्ण तथा सीतापते भगवान् श्रीराम सदा मुझे आनन्ददायक कुमारोपम प्रिय पुत्र प्रदान करें ॥ ६८ ॥

राम राघव गोविन्द देवकीसुत माधव ।
देहि मे तनयं श्रीश गोपबालकनायक ॥ ६९ ॥
राघव ! गोविन्द ! देवकीपुत्र ! माधव ! श्रीपते ! गोपबालकनायक श्रीकृष्ण ! मुझे पुत्र दीजिये ॥ ६९ ॥

वंशविस्तारकं पुत्रं देहि मे मधुसूदन ।
सुतं देहि सुतं देहि त्वामहं शरणं गतः ॥ ७० ॥
मधुसूदन ! मुझे वंशका विस्तार करनेवाला पुत्र दीजिये ।


१. संवृता दीयते पुरा इति पाठान्तरम् ।