विस्तृत हरिवंश पुराण (हरिवंशपर्व, विष्णुपर्व व भविष्यपर्व सहित)
Harivamsha Purana Hindi
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Harivamsha Purana Complete (Mahabharata Supplement) (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंसंतानगोपालस्तोत्रम् ११३७
पुत्र दीजिये !! पुत्र दीजिये !!! मैं आपकी शरणमें आया हूँ ॥ ७० ॥
ममाभीष्टसुतं देहि कंसारे माधवाच्युत ।
सुतं देहि सुतं देहि त्वामहं शरणं गतः ॥ ७१ ॥
कंसारे ! माधव ! अच्युत ! मुझे मनोवाञ्छित पुत्र प्रदान कीजिये ! पुत्र दीजिये !! पुत्र दीजिये !!! मैं आपकी शरणमें आया हूँ ॥ ७१ ॥
चन्द्रार्ककल्पपर्यन्तं तनयं देहि माधव ।
सुतं देहि सुतं देहि त्वामहं शरणं गतः ॥ ७२ ॥
माधव ! जबतक चन्द्रमा, सूर्य और कल्पकी स्थिति रहे, तबतकके लिये मुझे पुत्रपरम्परा प्रदान कीजिये ! पुत्र दीजिये !! पुत्र दीजिये !!! मैं आपकी शरणमें आया हूँ ॥ ७२ ॥
विद्यावन्तं बुद्धिमन्तं श्रीमन्तं तनयं सदा ।
देहि मे तनयं कृष्ण देवकीनन्दन प्रभो ॥ ७३ ॥
प्रभो ! देवकीनन्दन श्रीकृष्ण ! आप सदा मेरे लिये विद्वान्, बुद्धिमान् और धनसम्पन्न पुत्र प्रदान कीजिये ॥७३॥
नमामि त्वां पद्मनेत्र सुतलाभाय कामदम् ।
मुकुन्दं पुण्डरीकाक्षं गोविन्दं मधुसूदनम् ॥ ७४ ॥
कमलनयन श्रीकृष्ण ! मैं पुत्रकी प्राप्तिके लिये समस्त कामनाओंके दाता आप पुण्डरीकाक्ष श्रीकृष्ण मुकुन्द मधुसूदन गोविन्दको प्रणाम करता हूँ ॥ ७४ ॥
भगवन् कृष्ण गोविन्द सर्वकामफलप्रद ।
देहि मे तनयं स्वामिंस्त्वामहं शरणं गतः ॥ ७५ ॥
सम्पूर्ण मनोवाञ्छित फलोंके दाता ! गोविन्द ! स्वामिन् ! भगवन् ! श्रीकृष्ण ! मुझे पुत्र दीजिये । मैं आपकी शरणमें आया हूँ ॥ ७५ ॥
स्वामिंस्त्वं भगवन् राम कृष्ण माधव कामद ।
देहि मे तनयं नित्यं त्वामहं शरणं गतः ॥ ७६ ॥
स्वामिन् ! भगवन् ! राम ! कृष्ण ! कामनाओंके दाता माधव ! मुझे सदा पुत्र प्रदान कीजिये, मैं आपकी शरणमें आया हूँ ॥ ७६ ॥
तनयं देहि गोविन्द कञ्जाक्ष कमलापते ।
सुतं देहि सुतं देहि त्वामहं शरणं गतः ॥ ७७ ॥
गोविन्द ! कमलनयन ! कमलापते ! मुझे पुत्र दीजिये ! पुत्र दीजिये !! पुत्र दीजिये !!! मैं आपकी शरणमें आया हूँ ॥ ७७ ॥
पद्मापते पद्मनेत्र प्रद्युम्नजनक प्रभो ।
सुतं देहि सुतं देहि त्वामहं शरणं गतः ॥ ७८ ॥
लक्ष्मीपते ! कमलोचन ! प्रद्युम्नको जन्म देनेवाले प्रभो ! मुझे पुत्र दीजिये ! पुत्र दीजिये !! मैं आपकी शरणमें आया हूँ ॥ ७८ ॥
शङ्खचक्रगदाखङ्गशार्ङ्गपाणे रमापते ।
देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ॥ ७९ ॥
अपने हाथोंमें शङ्ख, चक्र, गदा, खड्ग और शार्ङ्गधनुष धारण करनेवाले रमापते ! श्रीकृष्ण ! मुझे पुत्र प्रदान कीजिये। मैं आपकी शरणमें आया हूँ ॥ ७९ ॥
नारायण रमानाथ राजीवपत्रलोचन ।
सुतं मे देहि देवेश पद्मपद्मानुवन्दित ॥ ८० ॥
नारायण ! रमानाथ ! कमलदललोचन ! देवेश्वर ! कमलालया लक्ष्मीसे वन्दित श्रीकृष्ण ! मुझे पुत्र प्रदान कीजिये ॥ ८० ॥
राम राघव गोविन्द देवकीवरनन्दन ।
रुक्मिणीनाथ सर्वेश नारदादिसुरार्चित ॥ ८१ ॥
देवकीसुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते ।
देहि मे तनयं श्रीश गोपबालकनायक ॥ ८२ ॥
राम ! राघव ! गोविन्द ! देवकीके श्रेष्ठ पुत्र ! रुक्मिणीनाथ ! सर्वेश्वर ! नारदादि महर्षियों तथा देवताओंसे पूजित देवकीकुमार गोविन्द ! वासुदेव ! जगत्पते ! श्रीकान्त ! गोपबालकनायक ! मुझे पुत्र प्रदान कीजिये ॥ ८१-८२ ॥
मुनिवन्दित गोविन्द रुक्मिणीवल्लभ प्रभो ।
देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ॥ ८३ ॥
मुनिवन्दित गोविन्द ! रुक्मिणीवल्लभ ! प्रभो ! श्रीकृष्ण ! मुझे पुत्र दीजिये, मैं आपकी शरणमें आया हूँ ॥ ८३ ॥
गोपिकार्जितपङ्कजेमरन्दासक्तमानस ।
देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ॥ ८४ ॥
गोपियोंद्वारा लाकर समर्पित किये गये कमलोंके मकरन्दमें आसक्त चित्तवाले श्रीकृष्ण ! मुझे पुत्र दीजिये । मैं आपकी शरणमें आया हूँ ॥ ८४ ॥
रमाहृदयपङ्केजलोल माधव कामद ।
ममाभीष्टसुतं देहि त्वामहं शरणं गतः ॥ ८५ ॥
लक्ष्मीके हृदयकमलके लिये लोलुप माधव ! समस्त कामनाओंके दाता श्रीकृष्ण ! मुझे मनोवाञ्छित पुत्र प्रदान कीजिये, मैं आपकी शरणमें आया हूँ ॥ ८५ ॥
वासुदेव रमानाथ दासानां मङ्गलप्रद ।
देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ॥ ८६ ॥
अपने सेवकोंके लिये मङ्गलदायक रमानाथ वासुदेव श्रीकृष्ण ! मुझे पुत्र प्रदान कीजिये, मैं आपकी शरणमें आया हूँ ॥ ८६ ॥