भारतकोश
विस्तृत हरिवंश पुराण (हरिवंशपर्व, विष्णुपर्व व भविष्यपर्व सहित)

विस्तृत हरिवंश पुराण (हरिवंशपर्व, विष्णुपर्व व भविष्यपर्व सहित)

Harivamsha Purana Hindi

महर्षि वेदव्यास द्वारा

स्रोत: Harivamsha Purana Complete (Mahabharata Supplement) (उद्गम)

DevanagariHindipublished1,169 पृष्ठ

पृष्ठ 1164, कुल 1169 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 1164

संतानगोपालस्तोत्रम् ११३७

पुत्र दीजिये !! पुत्र दीजिये !!! मैं आपकी शरणमें आया हूँ ॥ ७० ॥

ममाभीष्टसुतं देहि कंसारे माधवाच्युत ।
सुतं देहि सुतं देहि त्वामहं शरणं गतः ॥ ७१ ॥

कंसारे ! माधव ! अच्युत ! मुझे मनोवाञ्छित पुत्र प्रदान कीजिये ! पुत्र दीजिये !! पुत्र दीजिये !!! मैं आपकी शरणमें आया हूँ ॥ ७१ ॥

चन्द्रार्ककल्पपर्यन्तं तनयं देहि माधव ।
सुतं देहि सुतं देहि त्वामहं शरणं गतः ॥ ७२ ॥

माधव ! जबतक चन्द्रमा, सूर्य और कल्पकी स्थिति रहे, तबतकके लिये मुझे पुत्रपरम्परा प्रदान कीजिये ! पुत्र दीजिये !! पुत्र दीजिये !!! मैं आपकी शरणमें आया हूँ ॥ ७२ ॥

विद्यावन्तं बुद्धिमन्तं श्रीमन्तं तनयं सदा ।
देहि मे तनयं कृष्ण देवकीनन्दन प्रभो ॥ ७३ ॥

प्रभो ! देवकीनन्दन श्रीकृष्ण ! आप सदा मेरे लिये विद्वान्, बुद्धिमान् और धनसम्पन्न पुत्र प्रदान कीजिये ॥७३॥

नमामि त्वां पद्मनेत्र सुतलाभाय कामदम् ।
मुकुन्दं पुण्डरीकाक्षं गोविन्दं मधुसूदनम् ॥ ७४ ॥

कमलनयन श्रीकृष्ण ! मैं पुत्रकी प्राप्तिके लिये समस्त कामनाओंके दाता आप पुण्डरीकाक्ष श्रीकृष्ण मुकुन्द मधुसूदन गोविन्दको प्रणाम करता हूँ ॥ ७४ ॥

भगवन् कृष्ण गोविन्द सर्वकामफलप्रद ।
देहि मे तनयं स्वामिंस्त्वामहं शरणं गतः ॥ ७५ ॥

सम्पूर्ण मनोवाञ्छित फलोंके दाता ! गोविन्द ! स्वामिन् ! भगवन् ! श्रीकृष्ण ! मुझे पुत्र दीजिये । मैं आपकी शरणमें आया हूँ ॥ ७५ ॥

स्वामिंस्त्वं भगवन् राम कृष्ण माधव कामद ।
देहि मे तनयं नित्यं त्वामहं शरणं गतः ॥ ७६ ॥

स्वामिन् ! भगवन् ! राम ! कृष्ण ! कामनाओंके दाता माधव ! मुझे सदा पुत्र प्रदान कीजिये, मैं आपकी शरणमें आया हूँ ॥ ७६ ॥

तनयं देहि गोविन्द कञ्जाक्ष कमलापते ।
सुतं देहि सुतं देहि त्वामहं शरणं गतः ॥ ७७ ॥

गोविन्द ! कमलनयन ! कमलापते ! मुझे पुत्र दीजिये ! पुत्र दीजिये !! पुत्र दीजिये !!! मैं आपकी शरणमें आया हूँ ॥ ७७ ॥

पद्मापते पद्मनेत्र प्रद्युम्नजनक प्रभो ।
सुतं देहि सुतं देहि त्वामहं शरणं गतः ॥ ७८ ॥

लक्ष्मीपते ! कमलोचन ! प्रद्युम्नको जन्म देनेवाले प्रभो ! मुझे पुत्र दीजिये ! पुत्र दीजिये !! मैं आपकी शरणमें आया हूँ ॥ ७८ ॥

शङ्खचक्रगदाखङ्गशार्ङ्गपाणे रमापते ।
देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ॥ ७९ ॥

अपने हाथोंमें शङ्ख, चक्र, गदा, खड्ग और शार्ङ्गधनुष धारण करनेवाले रमापते ! श्रीकृष्ण ! मुझे पुत्र प्रदान कीजिये। मैं आपकी शरणमें आया हूँ ॥ ७९ ॥

नारायण रमानाथ राजीवपत्रलोचन ।
सुतं मे देहि देवेश पद्मपद्मानुवन्दित ॥ ८० ॥

नारायण ! रमानाथ ! कमलदललोचन ! देवेश्वर ! कमलालया लक्ष्मीसे वन्दित श्रीकृष्ण ! मुझे पुत्र प्रदान कीजिये ॥ ८० ॥

राम राघव गोविन्द देवकीवरनन्दन ।
रुक्मिणीनाथ सर्वेश नारदादिसुरार्चित ॥ ८१ ॥
देवकीसुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते ।
देहि मे तनयं श्रीश गोपबालकनायक ॥ ८२ ॥

राम ! राघव ! गोविन्द ! देवकीके श्रेष्ठ पुत्र ! रुक्मिणीनाथ ! सर्वेश्वर ! नारदादि महर्षियों तथा देवताओंसे पूजित देवकीकुमार गोविन्द ! वासुदेव ! जगत्पते ! श्रीकान्त ! गोपबालकनायक ! मुझे पुत्र प्रदान कीजिये ॥ ८१-८२ ॥

मुनिवन्दित गोविन्द रुक्मिणीवल्लभ प्रभो ।
देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ॥ ८३ ॥

मुनिवन्दित गोविन्द ! रुक्मिणीवल्लभ ! प्रभो ! श्रीकृष्ण ! मुझे पुत्र दीजिये, मैं आपकी शरणमें आया हूँ ॥ ८३ ॥

गोपिकार्जितपङ्कजेमरन्दासक्तमानस ।
देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ॥ ८४ ॥

गोपियोंद्वारा लाकर समर्पित किये गये कमलोंके मकरन्दमें आसक्त चित्तवाले श्रीकृष्ण ! मुझे पुत्र दीजिये । मैं आपकी शरणमें आया हूँ ॥ ८४ ॥

रमाहृदयपङ्केजलोल माधव कामद ।
ममाभीष्टसुतं देहि त्वामहं शरणं गतः ॥ ८५ ॥

लक्ष्मीके हृदयकमलके लिये लोलुप माधव ! समस्त कामनाओंके दाता श्रीकृष्ण ! मुझे मनोवाञ्छित पुत्र प्रदान कीजिये, मैं आपकी शरणमें आया हूँ ॥ ८५ ॥

वासुदेव रमानाथ दासानां मङ्गलप्रद ।
देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ॥ ८६ ॥

अपने सेवकोंके लिये मङ्गलदायक रमानाथ वासुदेव श्रीकृष्ण ! मुझे पुत्र प्रदान कीजिये, मैं आपकी शरणमें आया हूँ ॥ ८६ ॥

विस्तृत हरिवंश पुराण (हरिवंशपर्व, विष्णुपर्व व भविष्यपर्व सहित) · पृष्ठ 1164, कुल 1169 में से · BharatKosha