विस्तृत हरिवंश पुराण (हरिवंशपर्व, विष्णुपर्व व भविष्यपर्व सहित)
Harivamsha Purana Hindi
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Harivamsha Purana Complete (Mahabharata Supplement) (उद्गम)
पृष्ठ 281, कुल 1169 में से
संदर्भ में पढ़ेंविष्णुपर्व ] षोडशोऽध्यायः २५९ शाली मेघयुक्त वायुसे अभिषिक्त होनेके कारण जो पत्तोंके के-सब अनुपम शोभा-सम्पत्तिसे प्रकाशित हो उठे हैं ॥ २३ ॥ बाहुल्यसे घने दिखायी देते थे, वे सभी वृक्ष अब पत्तोंके पङ्कजानि च ताम्राणि तथान्यानि सितान्यपि । विरल हो जानेसे प्रसादको प्राप्त हो रहे हैं (पहले वहाँ उत्पलानि च नीलानि भेजिरे वारिजां श्रियम् ॥ २४ ॥ अन्धकार छाया रहता था अब प्रकाश हो गया है) ॥ १७ ॥ 'लाल कमल, अन्यान्य श्वेत-पीत आदि कमल तथा नील सितवर्णाम्बुदोष्णीषं हंसचामरवीजितम् । उत्पल भी जलजनित शोभाके भागी हुए हैं ॥ २४ ॥ पूर्णचन्द्रामलच्छत्रं साभिषेकमिवाम्बरम् ॥ १८ ॥ मदं जहुः सितापाङ्गा मन्दं ववुरिरेऽनिलाः । अभवद् व्यभ्रमाकाशमभूच्च निभृतोऽर्णवः ॥ २५ ॥ 'इस समय आकाश मूर्धाभिषिक्त राजाके समान जान पड़ता है। सफेद बादल ही उसकी श्वेत पगड़ी या उज्ज्वल