विस्तृत हरिवंश पुराण (हरिवंशपर्व, विष्णुपर्व व भविष्यपर्व सहित)
Harivamsha Purana Hindi
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Harivamsha Purana Complete (Mahabharata Supplement) (उद्गम)
पृष्ठ 454, कुल 1169 में से
संदर्भ में पढ़ें| ४३२ | श्रीमन्महाभारते खिलभागे | [ हरिवंशे |
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वे यदुपुङ्गव वीर सिंधुराजके जलप्राय देशमें जा पहुँचे, जो नाना प्रकारकी लताओंसे विचित्र शोभा पा रहा था। नारियलके बहुत-से वन वहाँ सुशोभित होते थे। नागकेसरोंके झुंड इधर-उधर सब ओर फैले थे, जिनसे वहाँकी कमनीयता और भी बढ़ गयी थी। केवड़ोंकी झाड़ियोंसे वह प्रदेश अलंकृत हो रहा था। कहीं-कहीं ताड़, पुन्नाग, बकुल और अंगूरके वन उस भूभागको और घना बना रहे थे ॥ २१-२२ ॥
ते तत्र रमणीयेषु विषयेषु सुखप्रियाः।
मुमुदुर्यादवाः सर्वे देवाः स्वर्गगता इव ॥ २३ ॥
जिन्हें सुख ही प्रिय है, वे सब यादव वहाँके रमणीय स्थानोंमें स्वर्गमें रहनेवाले देवताओंके समान आनन्दका अनुभव करने लगे ॥ २३ ॥
पुरवास्तु विचिन्वन् स कृष्णस्तु परवीरहा।
ददर्श विपुलं देशं सागरेणोपशोभितम् ॥ २४ ॥
शत्रुवीरोंका संहार करनेवाले श्रीकृष्णने नगरके वास्तुस्थानकी खोज करते हुए समुद्रसे सुशोभित होनेवाले एक विशाल प्रदेशको देखा ॥ २४ ॥
वाहनानां हितं चैव सिकताताम्रमृत्तिकम्।