भारतकोश
विस्तृत हरिवंश पुराण (हरिवंशपर्व, विष्णुपर्व व भविष्यपर्व सहित)

विस्तृत हरिवंश पुराण (हरिवंशपर्व, विष्णुपर्व व भविष्यपर्व सहित)

Harivamsha Purana Hindi

महर्षि वेदव्यास द्वारा

स्रोत: Harivamsha Purana Complete (Mahabharata Supplement) (उद्गम)

DevanagariHindipublished1,169 पृष्ठ

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५८ श्रीमन्महाभारते खिलभागे [ हरिवंशे


'महाद्युते ! यदि मैं इससे भी अधिक आपके अनुग्रह-का पात्र होऊँ, तो मैं आपके मुखसे एक प्रश्नका उत्तर सुनना चाहता हूँ' ॥ ३२ ॥
स मामुवाच धर्मात्मा ब्रूहि भीष्म यदिच्छसि ।
छेत्तास्मि संशयं सर्वं यन्मां पृच्छसि भारत ॥ ३३ ॥
तब उन धर्मात्माने मुझसे कहा—'भीष्म ! बता, तू मुझसे क्या पूछना चाहता है ? भारत ! तू मुझसे जो कुछ पूछेगा, तेरे उस संदेहको मैं दूर करूँगा' ॥ ३३ ॥
अपृच्छं तमहं तातं तत्रान्तर्हितमेव च ।
गतं सुकृतिनां लोकं कौतूहलसमन्वितः ॥ ३४ ॥
तब मैंने वहाँ अदृश्य होकर खड़े और पुण्यात्माओंके लोकोंमें पहुँचे हुए अपने पितासे कौतूहलमें भरकर पूछा ॥ ३४॥

भीष्म उवाच
श्रूयन्ते पितरो देवा देवानामति देवताः ।
देवाश्च पितरोऽन्ये वा कान् यजामोऽद्यं पुनः ॥ ३५ ॥
भीष्मजीने पूछा—पिताजी ! पितृगण देवताओंके भी देवता सुने जाते हैं। देवता ही पितर हैं या दोनों भिन्न-भिन्न हैं ? हम किनकी पूजा