विस्तृत हरिवंश पुराण (हरिवंशपर्व, विष्णुपर्व व भविष्यपर्व सहित)
Harivamsha Purana Hindi
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Harivamsha Purana Complete (Mahabharata Supplement) (उद्गम)
पृष्ठ 964, कुल 1169 में से
संदर्भ में पढ़ें९४० श्रीमद्भारते खिलभागे [ हरिवंशे
विदारितास्त्रिशूलैश्च केचित् तत्र गतासवः ॥ ३५ ॥ परस्परकी मारसे पीड़ित हो कितने ही योद्धा समराङ्गणसे भाग गये। किन्हींके हृदय विदीर्ण हो गये। कोई पैर कट जानेसे पृथ्वीपर सो रहे थे और कितने ही त्रिशूलोंसे विदीर्ण हो वहाँ प्राणोंसे हाथ धो बैठे थे ॥ ३४-३५॥
तत् सुभीमं महद्युद्धं देवदानवसंकुलम् । बभूव तुमुलं युद्धं शिलापादपसंकुलम् ॥ ३६ ॥ वह देवताओं और दानवोंसे भरा हुआ महायुद्ध बड़ा भयंकर प्रतीत होता था; शिलाओं और वृक्षोंके प्रहारसे व्याप्त होनेके कारण उसकी भयंकरता और भी बढ़ गयी थी ॥ ३६ ॥
धनुर्ज्यातन्त्रिमधुरं हिक्कातालसमन्वितम् । आर्तस्तनितघोषार्थं युद्धं गान्धर्वमावभौ ॥ ३७ ॥ वहाँ धनुषकी प्रत्यञ्चारूपी वीणाकी मधुर तान छिड़ी हुई थी। योद्धाओंको जो हिचकियाँ आती थीं, वे ही मानो ताल थीं। पीड़ितोंके आर्तनाद ही मृदङ्ग आदि वाद्योंके घोष एवं आलाप थे। इस प्रकार वह युद्ध गान्धर्वमहोत्सव (संगीतसमारोह) के समान प्रतीत होता था ॥ ३७ ॥
कुवेरः स धनुष्पाणिर्दानवान् रणमूर्धनि । दिशो विद्रावयामास संक्रुद्धः शरवृष्टिभिः ॥ ३८ ॥ उस समय क्रोधमें भरे हुए कुवेर हाथमें धनुष लेकर युद्धके मुहानेपर बाणोंकी वर्षा करके दानवोंको सम्पूर्ण दिशाओंमें खदेड़ने लगे ॥ ३८ ॥
कुवेरेणार्दितं सैन्यं विद्रुतं प्रेक्ष्य दानवः । अभ्यद्रवदनुह्रादः प्रगृह्य महतीं शिलाम् ॥ ३९ ॥ अपनी सेनाको कुवेरसे पीड़ित हुई देख दानव अनुह्राद एक बहुत बड़ी शिला हाथमें लेकर कुवेरकी ओर दौड़ा ॥
क्रोधाद् द्विगुणरक्ताक्षः पितृतुल्यपराक्रमः । शिलां तां पातयामास कुवेरस्य रथोत्तमे ॥ ४० ॥ उस समय उसके नेत्र क्रोधसे दुगुने लाल हो रहे थे। वह अपने पिता हिरण्यकशिपुके समान पराक्रमी था। उसने कुवेरके उत्तम रथपर उस शिलाको दे मारा ॥ ४० ॥
आपतन्तीं शिलां दृष्ट्वा गदापाणिर्धनाधिपः । रथादाप्लुत्य वेगेन वसुधायां व्यतिष्ठत ॥ ४१ ॥ उस शिलाको आती देख हाथमें गदा लिये हुए कुवेर अपने रथसे वेगपूर्वक कूदकर पृथ्वीपर खड़े हो गये ॥ ४१ ॥
सचक्रकूवरहयं सध्वजं सशरासनम् । भङ्क्त्वा रथोत्तं तस्य निपपात शिला भुवि ॥ ४२ ॥ वह शिला कुवेरके उत्तम रथको चक्र, कूबर, घोड़े, ध्वज और धनुषसहित तोड़-फोड़कर भूमिपर गिर पड़ी ॥ ४२ ॥
विमथ्य तु कुवेरस्य प्रह्लादस्यानुजो रथम् । शूराणां कदनं चक्रे सस्कन्धविटपैर्द्रुमैः ॥ ४३ ॥ कुवेरके रथको नष्ट-भ्रष्ट करके प्रह्लादके छोटे भाई अनुह्रादने तनों और शाखाओंसहित वृक्षोंद्वारा देवपक्षके शूर-वीरोंका संहार आरम्भ किया ॥ ४३ ॥
निर्भिन्नशिरसो भग्नास्त्रिदशाः शोणितोक्षिताः । द्रुमप्रव्यथिताङ्गाश्च निपेतुर्धरणीतले ॥ ४४ ॥ देवताओंके सिर फूट गये। अङ्ग-भङ्ग हो गये। वे रक्तसे नहा गये। वृक्षोंकी मारसे उनके सारे अङ्ग व्यथित होने लगे और वे पृथ्वीपर गिर पड़े ॥ ४४ ॥
विद्राव्य विपुलं सैन्यमनुह्रादो महासुरः । गिरिशृङ्गं गृहीत्वा तु कुवेरमभिदुद्रुवे ॥ ४५ ॥ महान् असुर अनुह्रादने देवताओंकी विशाल सेनाको भगाकर एक पर्वतका शिखर हाथमें ले लिया और कुवेरपर धावा किया ॥ ४५ ॥
तमापतन्तं धनदो गदामुद्यम्य वीर्यवान् । विनदित्वाऽऽह्वयामास दानवेन्द्रं महाबलम् ॥ ४६ ॥ उसे आते देख पराक्रमी कुवेरने गदा उठा ली और बड़े जोरसे गरजकर उस महाबली दानवराजको ललकारा ॥
तस्य दैत्यस्य संक्रुद्धो गदां तां बहुकण्टकाम् । न्यपातयत वित्तेशो दानवस्योरसि प्रभो ॥ ४७ ॥ प्रभो ! धनके स्वामी कुवेरने कुपित होकर उस दैत्य एवं दानवकी छातीपर उस गदाको दे मारा, जिसमें बहुत-से काँटे लगे हुए थे ॥ ४७ ॥
दैत्यः स क्रोधताम्राक्षस्तं प्रहारमचिन्तयन् । वित्तेशस्योपरि तदा गिरिशृङ्गमपातयत् ॥ ४८ ॥ परंतु क्रोधसे लाल आँखें किये उस दैत्यने उनके उस प्रहारकी कोई परवा नहीं की और धनके स्वामी कुवेरपर तत्काल ही उस पर्वतशिखरको गिरा दिया ॥ ४८ ॥
स विह्वलितसर्वाङ्गो गिरिशृङ्गेन ताडितः । पपात सहसा भूमौ विशीर्ण इव पर्वतः ॥ ४९ ॥ पर्वतशिखरकी चोट खाकर कुवेरके सारे अङ्ग विह्वल हो गये और वे चूर-चूर हुए पर्वतकी भाँति सहसा पृथ्वीपर गिर पड़े ॥ ४९ ॥
वित्तेशं विह्वलं दृष्ट्वा सर्वे ते यक्षराक्षसाः । परिवार्य महात्मानं ररक्षुर्भीमविक्रमाः ॥ ५० ॥ महात्मा धनेशको विह्वल हुआ देख वे भयंकर पराक्रमी समस्त यक्ष और राक्षस उन्हें चारों ओरसे घेरकर उनकी रक्षा करने लगे ॥ ५० ॥
मुहूर्तं विह्वलो भूत्वा पुनर्वैश्रवसः सुतः । उपतस्थे च सहसा धनदः क्रोधमूर्च्छितः ॥ ५१ ॥ स ननाद महानादं त्रैलोक्यमभिनादयन् । जनयंश्च निर्घोषं विधमन्निव पर्वतान् ॥ ५२ ॥ दो घड़ीतक व्याकुल रहनेके पश्चात् विश्रवाके पुत्र धनदाता कुवेर सहसा उठकर खड़े हो गये और पुनः क्रोधसे मूर्च्छित हो तीनों लोकोंको प्रतिध्वनित करते हुए बड़े जोर-