भारतकोश
हर्षचरितम् (महाकवि बाणभट्ट - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)

हर्षचरितम् (महाकवि बाणभट्ट - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)

Harshacharitam of Banabhatta with Sanskrit & Hindi Commentary

महाकवि बाणभट्ट / पं. जगन्नाथ शास्त्री द्वारा

DevanagariSanskritpublished506 पृष्ठ

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६८ हर्षचरितम् च्छ्रजातिभिः सर्वदेशान्तरागतैश्च दूतमण्डलैरूपास्यमानम् , सर्वप्रजानि- र्माणभूमिमिव प्रजापतीनां लोकत्रयसारोच्चयरचितं चतुर्थमिव लोकम् , महाभारतशतैरप्यकथनीयसमृद्धिसंभारम् , कृतयुगसहस्रैरिव कल्पितसन्नि- वेशम् , स्वर्गाबुर्दैरिव विहितरामणीयकम् , राजलक्ष्मीकोटिभिरिव कृत- परिग्रहं राजद्वारमगमत् । अभवच्चास्य जातविस्मयस्य मनसि—'कथमिवेदमियतप्रमाणं प्राणि- जातं जनयतां प्रजासृजां नामीत्परिश्रमः, महाभूतानां वा परिक्षयः, पर- माणूनां वा विच्छेदः, कालस्य वान्तः, आयुषो वा व्युपरमः, आकृतीनां वा परिसमाप्तिः' इति । मेखलकस्तु दूरादेव द्वारपाललोकेन प्रत्याभिज्ञाय- मानः 'तिष्ठतु तावत्क्षणमात्रमत्रैव पुण्यभागी' इति तमभिधायाप्रतिहतः पुरः प्राविशत् । प्रोक्तमधीयते पाराशरियो यतयस्तैः । वर्णिभिर्ब्रह्मचारिभिः । सर्वप्रजेति । अत्र हि स्थित्वा यदि प्रजापतयो न सृज्येयुः तत्कथं सर्व भावाः कारणभूता इव तत्र लभ्येरन् । अर्बुदं दशकोटयः । कोटिर्लक्षशतम् । इह तु बहुसंख्योपलक्षणार्थार्बुदकोटिशब्दौ । परिसमाप्तिरिनारम्भः । तिष्ठत्विति । विद्यायुक्ते कदाचिदनादरशङ्केत्येतदर्थमाह- पुण्यभागीति । पतियों की सब प्रकार की प्रजाओं के निर्माण का स्थान था। तीनों लोकों के सार को इकट्ठा करके मानों कोई चौथा लोक बना दिया गया था। सैकड़ों महाभारत भी लिखे जाँय फिर भी उसके वैभव का वर्णन नहीं किया जा सकता। मानों हजारों सतयुगों ने अपने अपने रहने के लिए वहाँ भवन बना लिया था। मानों करोड़ों स्वर्ग वहाँ आ टिके थे और उसकी शोभा बढ़ा रहे थे। करोड़ों की संख्या में राजलक्ष्मी ने आकर उसे मानों अपना आश्रय बना लिया था। इस दृश्य को देखकर बाण के मन में बड़ा आश्चर्य हुआ। वह सोचने लगा—'इतने प्राणियों को उत्पन्न करते हुए प्रजापतियों को कैसे नहीं थकान हुई ? या पाँचों महाभूत समाप्त क्यों न हुए ? परमाणुओं का विच्छेद क्यों न हुआ ? समय का अन्त या आयु का खात्मा या आकृतियों की परिसमाप्ति क्यों न हुई ?' इधर मेखलक को दूर से ही द्वारपालों ने देखा और पहचान लिया । 'पुण्यभागी आप क्षण भर यहीं ठहरें' बाण से यह कह मेखलक बेरोक-टोक भीतर घुस गया।