हर्षचरितम् (महाकवि बाणभट्ट - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)
Harshacharitam of Banabhatta with Sanskrit & Hindi Commentary
महाकवि बाणभट्ट / पं. जगन्नाथ शास्त्री द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२३६ हर्षचरितम् चकार्षीत् । शोभने च दिवसे ग्रहवर्मणा कन्यां प्रार्थयितुं प्रेषितस्य पूर्वा- गतस्यैव प्रधानदूतपुरुषस्य करे सर्वराजकुलसमक्षं दुहितृदानजलमपातयत् । जातमुदि कृतार्थे गते च तस्मिन्नासन्नेषु च विवाहदिवसेष्वामदीय- मानताम्बूलपटवासकुसुमप्रसाधितसर्वलोकम् , सकलदेशादिश्यमान- शिल्पिसार्थगमनम् , अवनिपालपुरुषगृहीतसमग्रग्रामीणानीयमानोप- करणसंभारम् , राजदौवारिकोपनीयमानानेকনृपोपायनम् , उपनिम- न्त्रिागतबन्धुवर्गसंवर्गणव्यग्रराजवल्लभम् , लब्धमधुमदप्रचण्डचर्मकार- करपुटोल्लालितकोणपटुविघटनरणन्मङ्गलपटहम् , पिष्टपञ्चाङ्गुलमण्ड्यमा- नोलूखलमुसलशिलाद्युपकरणम् , अशोषाशामुखाविर्भूतचारणपरम्परापूर्य- माणप्रकोष्ठप्रतिष्ठाप्यमानेन्द्राणीदैवतम् , सितकुसुमविलेपनवसनसत्कृतैः सूत्रधारैरादीयमानविवाहवेदीसूत्रपातम् , उत्कूर्चककरैश्च सुधाकर्पूरस्कन्धै- रधिरोहिणीसमारूढैर्धवैर्धवलीक्रियमाणप्रासादप्रतोलीप्राकारशिखरम् , क्षु- जातमुदीत्यादौ । एवं राजकुलमासीदिति संबन्धः । ग्रामीणा ग्राम्याः । राजदौ- वारिका दूताः । संवर्गणमावर्तनम् । पिष्टमातर्पणम् । चारणाः कुशीलवाः । प्रकोष्ठं बहिर्द्वारम् । सूत्रधारैः स्थपतिभिः । अधिरोहिणी निःश्रेणिः । धवैः पुरुषैः । क्षुण्णश्वू- जाने पर पहले से ही आये हुए प्रधान दूत के हाथ पर समस्त राजकुल की उपस्थिति में कन्यादान का जल गिराया । वह दूत प्रसन्न और कृतकृत्य होकर लौट गया । विवाह के दिन भी निकट आए । राजकुल की ओर से आम तौर पर सब लोगों की खातिर के लिए पान के बीड़े, कपड़े की सुगन्धि और फूल बाँटे जाने लगे । दूसरे देशों से कारीगर बुलाइट पर आने लगे । राजा के नियुक्त सैनिक गाँव वालों को पकड़-पकड़कर उनसे सब सामग्री उठवाकर लाने लगे । राजा के दौवारिक अनेक राजाओं के दिए हुए तरह-तरह के उपहारों को लाकर रखने लगे । निमन्त्रित होकर आए हुए रिश्तेदारों को आदरपूर्वक राजा के प्रिय पात्र लोग ठहराने के काम में व्यस्त थे । शराब के नशे में धुत्त होकर ढोल बजाने वाला चमार डंका लिए हुए धमाधम ढोल पीट रहा था । ओखली, मूसर और सिल आदि पत्थर की सामग्री जुटाकर उन पर ऐपन के थापे दिए जाने लगे । अनेक दिशाओं से दूर दूर से आए हुए चारण लोग जिस कोठरी में जमा थे उसमें इन्द्राणी की मूर्ति के रूप में दई- देवता पधराए गए थे । सफेद फूल, चन्दन और वस्त्र पाकर आदर पाए हुए सूत्रधार ( मिस्त्री लोग ) विवाह की वेदी बनाने में सूत से नाप-तौल करने लगे । पोतने वाले