भारतकोश
हर्षचरितम् (महाकवि बाणभट्ट - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)

हर्षचरितम् (महाकवि बाणभट्ट - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)

Harshacharitam of Banabhatta with Sanskrit & Hindi Commentary

महाकवि बाणभट्ट / पं. जगन्नाथ शास्त्री द्वारा

DevanagariSanskritpublished506 पृष्ठ

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२४६ हर्षचरितम् मानम्, उपरि कालमहिषालंकारकालायसकिङ्किणीभिरिव कटु क्वणन्ती- भिर्दिवसं वायसमण्डलीभिर्भ्रमन्तीभिरावेद्यमानप्रत्यासन्नाशुभम्, क्वचि- त्प्रतिशायितस्निग्धबान्धवाराध्यमानाहिर्बुध्नम्, क्वचिद्दीपिकादह्यमानकुल- पुत्रकप्रसाद्यमानमातृमण्डलम्, क्वचिन्मुण्डोपहारहरणोद्यतद्रविडप्रार्थ्यमा- नामर्दकम्, क्वचिदान्ध्रोद्ध्रियमाणबाहुवप्रोपयाच्यमानचण्डिकम्, अन्यत्र शिरोविधृतविलीयमानगलद्गुग्गुलुविकलनवसेवकानुनीयमानमहाकालम्, अपरत्र निशितशस्त्रीनिकृत्तात्ममांसहोमप्रसक्ताप्तवर्गम्, अपरत्र प्रकाशन- रपतिकुमारक्रियमाणमहामांसविक्रयप्रक्रमम्, उपहतमिव श्मशानपांशु- भिरमङ्गलैरिव परिगृहीतम्, यातुधानैरिव विध्वस्तम्, कलिकालेनेव कवलितम्, पापपटलैरिव संच्छादितम्, अधर्मविचेष्टितैरिव लुण्ठितम्, अनित्यताधिकारैरिवाक्रान्तम्, नियतिविलासैरिवात्मीकृतम्, शून्यमिव सुप्तमिव मुषितमिव विलक्षितमिव छलितमिव मूर्च्छितमिव स्कन्धावारं समाससाद ।

विक्रेयं वस्तु । कालो यमः । कालायसं लोहजातिभेदः । किङ्किण्यः सूक्ष्मघण्टिकाः । प्रतिशायिता उपोषिताः । अहिर्बुध्नो हरः । मुण्डं शिरः । द्रविडा आन्ध्राश्च जनपद- भेदाः । आमर्दको वेतालः । रौद्रदेवताभेद इत्यन्ये ।

ओर घिर रही थी । होने वाले असगुन की सूचना देते हुए झुण्ड के झुण्ड कौवे काँव- काँव करते हुए ऊपर मंडरा रहे थे, मानों यमराज के भैंसे की गर्दन में लगी हुई लोहा के घुंघुरुओं की माला बज रही थी । कहीं राजा के स्नेही बान्धव लोग उपासे रहकर भगवान् शङ्कर की आराधना कर रहे थे । कहीं राजघरानों के कुलपुत्र दियाली जलाकर सप्त मातृकाओं को प्रसन्न कर रहे थे । कहीं पाशुपतमतानुयायी द्रविड़ मुण्डोपहार चढ़ाकर बेताल को प्रसन्न करने की तैयारी में था । कहीं आंध्र देश का पुजारी अपनी भुजा उठा- कर चण्डिका के लिए मनौती मान रहा था । एक ओर नए सेवक सिर पर गुग्गुल जला कर उसकी पीड़ा की विकलता में महाकाल को प्रसन्न कर रहे थे । एक ओर आप्त वर्ग के लोग तेज छुरी से अपना मांस काट-काट कर होम कर रहे थे । एक ओर राजकुमार लोग खुलेआम महामांस बेचने की तैयारी कर रहे थे । वह स्कन्धावार मानों श्मशान की धूल से दूषित हो गया हो, अमङ्गल चारों ओर घिर रहे हों, राक्षसों ने उसे विध्वंस कर दिया हो, कलिकाल उसे निगल गया हो, पापपटल उस पर छा गया हो, अधर्म के कार्यों ने उसे लूट लिया हो, अनित्यता के अधिकार उस पर आक्रान्त हों, नियति के