हर्षचरितम् (महाकवि बाणभट्ट - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)
Harshacharitam of Banabhatta with Sanskrit & Hindi Commentary
महाकवि बाणभट्ट / पं. जगन्नाथ शास्त्री द्वारा
पृष्ठ 386, कुल 506 में से
संदर्भ में पढ़ेंअथ युगपत्प्रधावितबहुपुरुषपरम्पराहूयमानः, स्वमन्दिरादप्रतिपालित- करेणुश्चरणाभ्यामेव संभ्रान्तः, ससंभ्रमैर्दण्डिभिरुत्सार्यमाणजनपदः, पदे पदे प्रणमतः प्रतिदिशमभिषग्वरान्वारणानां विभावरीवार्ताः पृच्छन्नु- च्छ्रितशिखिपिच्छलाञ्छितवंशलतावनगहनगृहीतदिगायामैर्विन्ध्यवनैरिव वारणबन्धविमर्दोद्योगागतैः, पुरःप्रधावद्भिरनायत्तमण्डलैराधोरणगणैश्च मरकतहरितघासमुष्टीश्च दर्शयद्भिर्नवग्रहगजपतींश्च प्रार्थयमानैश्च लब्धाभि- मतमत्तमातङ्गमुदितमानसैश्च सुदूरमुपसृत्य नमस्यद्भिरात्मीयमातङ्गमदा- गमांश्च निवेदयद्भिः, डिण्डिमाधिरोहणाय च विज्ञापयद्भिः, प्रमादपति- तापराधापहृतद्विरददुःखधृतदीर्घश्मश्रुभिरमतो गच्छद्भिः, अभिनवोप- सूतैश्च कर्पटिभिर्वारणाप्तिसुखप्रत्याशया धावमानैः, गणिकाधिकारिगणे- श्चिरलब्धान्तरैरुच्छ्रितकरैः, कर्मण्यकरेणुकासंकथनाकुलैरुल्लासितपल्लव- चिह्नाभिररण्यपालपङ्क्तिभिश्च, निष्पादितनवग्रहनागनिवहनिवेदनोद्यताभि- रुत्तम्भिततुङ्गतोत्रवनाभिर्महामात्रपेटकैश्च प्रकटितकरिकर्मचर्मपुटैः, अभि- अथत्यादौ। स्कन्दगुप्त एतैरेतैः क्रियमाणकोलाहलो राजकुलं विवेशेति संब- न्धः। भिषग्वरान्वैद्योत्तमान्। बन्धो रोधनमपि। अनायत्ता हस्तिपार्श्वरक्षिणः। आधोरणा गजारोहाः। डिण्डिमः पटहः। गणिका गजानां प्रतिलोभनार्था हस्तिनी। कर्मण्यकरेणुका करिग्रहकुशला करिणी। तुदन्त्यनेनेति तोत्रं प्रेषणकम्। महामात्राः प्रधानहस्त्यारोहाः। तेषां पेटकैः समूहैः। करिणां कर्मार्थं युद्ध- आज्ञा पाते ही अनेक युवक स्कन्दगुप्त को ताबड़तोड़ बुलाने पहुंचे। वह अपने भवन से निजी हथिनी की प्रतीक्षा किए बिना पैदल ही झटपट राजकुल के लिए चल पड़ा। घबराए हुए दण्डधारी सैनिक उसके सामने से लोगों की भीड़ हटाने लगे। पद-पद पर चारों ओर से प्रणाम करते हुए हाथियों के बारे में चिकित्सकों से पूछता जाता था कि पिछली रात उनका क्या हाल रहा ? उसके चारों ओर गजकटक का शोर हो रहा था। विन्ध्याचल के वनों के समान ऊंचे बांस के सिरे पर मोर के पंख बांधे दिशाओं में व्याप्त होने वाले, हाथियों को हांका देकर पकड़ने के लिए दूर-दूर से बुलाए गए, हाथियों के पार्श्व- रक्षी लोग और महावत, जो मरकत के समान हरी-हरी घास की मूठ देकर नए पकड़ कर लाए गए हाथियों को परचा रहे थे और मतवाले हाथियों के बात मान लेने पर प्रसन्न हो रहे थे, दूर से दौड़ कर उसे प्रणाम करने लगे, अपने अपने हाथियों के यौवन के कारण मद फूट कर बहने की सूचना देने लगे । बड़ी अवस्था के हाथियों के डिंडिमाधिरोहण के लिए निवेदन करने लगे। कुछ महावत गिर जाने के अपराध के कारण हाथी के छिन जाने के