भारतकोश
हर्षचरितम् (महाकवि बाणभट्ट - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)

हर्षचरितम् (महाकवि बाणभट्ट - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)

Harshacharitam of Banabhatta with Sanskrit & Hindi Commentary

महाकवि बाणभट्ट / पं. जगन्नाथ शास्त्री द्वारा

DevanagariSanskritpublished506 पृष्ठ

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पृष्ठ 469

४२२ हर्षचरितम् शोकावेशविवशा वैश्वानरं विशति। संभावयतु तामप्रोषितप्राणां भगवान्। अभ्युपपद्यता समुचितैः समाश्वासनैः। अनुपरतपूर्वं कृमिकीटप्रायमपि दुःखितं दयाराशेरार्यस्य गोचरगतम्' इति। राजा तु जातानुजाशङ्कः सोदर्यस्नेहाद्धान्तर्द्रुत इव दुःखेन दोदूयमान- हृदयः कथमपि गद्गदिकागृहीतकण्ठो विकलवाग्बाष्पायमाणदृष्टिः पप्रच्छ— 'पाराशरिन् ! कियद्दूरे सा योषिदेवंजातीया जीवेद्वा कालमेतावन्तमिति। पृष्टा वा त्वया भद्रे ! कासि, कस्यासि, कुतोऽसि, किमर्थं वनमिदमभ्युप- गतासि, विशसि च किंनिमित्तमनलम् ? इत्यादितश्च प्रभृति कात्स्न्र्येन कथ्यमानमिच्छामि श्रोतुं कथमार्यस्य गता दर्शनगोचरमाकारतो वा कीदृशी' इति। तथाभिहितस्तु भूभुजा भिक्षुराचचक्षे—'महाभाग ! श्रूयताम्—अहं हि प्रत्यूषस्येवाद्य वन्दित्वा भगवन्तमनेनैव नदीरोधसा सैकतसुकुमारेण यदृच्छया विहृतवानतिदूरम्। एकस्मिंश्च वनलतागहने गिरिनदीसमीप- भाजि भ्रमरीणामिव हिमहतकमलाकरकातराणां रुसितं सार्यमाणानाम- यदृच्छया स्वेच्छया सार्यमाणानां श्रुतिरीत्यास्थाप्यमानानां स्वराणां विशिष्टम-

समझायें। उचित आश्वासनों द्वारा अनुग्रह करें। मरने से पूर्व दुःख में पड़े हुए कीड़े-पतंग भी दयाराशि आर्य की करुणा के पात्र हैं।' राजा के मन में बहिन की शंका उत्पन्न हुई। स्नेह के कारण वे जैसे पिघल गए। दुःख से उनका हृदय भर गया और कण्ठ में घिग्घी आने लगी। वाणी में विकलता हो उठी और आँखें आँसू से भर आईं। तब उन्होंने पूछा—'हे पाराशरिन्, कितनी दूर पर वह स्त्री है और इतनी देर तक वह जीवित रह सकेगी ? तुमने क्या उससे पूछा है कि भद्रे, तुम कौन हो ? किसकी हो ? कहाँ की हो ? इस जंगल में किसलिए आ निकली हो ? और किस निमित्त से अग्नि में प्रवेश कर रही हो ? इस प्रकार आदि से लेकर पूरा वृत्तान्त आपके द्वारा सुनना चाहता हूँ। वह कैसे आपको दिखाई पड़ी ? और आकार से कैसी है ?' राजा के ऐसा पूछने पर भिक्षु ने उत्तर दिया—'महाभाग, सुनिए—मैं आज प्रातः भगवान् की वन्दना करके इस नदी के सैकत-सुकुमार तीर पर स्वेच्छा से घूमता हुआ बहुत दूर निकल गया। गिरि नदी के निकट एक लताओं के बने झुरमुट में मैंने बहुत-सी