भारतकोश
हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)

हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)

Hind Swaraj by Mahatma Gandhi

मोहनदास करमचन्द गाँधी (महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished150 पृष्ठ

पृष्ठ 143, कुल 150 में से

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हिन्द स्वराज्य होने दीजिए कि स्वराज्य पाने के लिए हमें गोला-बारूद की ज़रूरत है। मॉडरेटों से मैं कहूँगा कि हम खाली आजिजी करना चाहें, यह तो हमारी हीनता होगी। उसमें हम अपना हल्कापन कुबूल करते हैं। 'अंग्रेजों से सम्बन्ध रखना हमारे लिए ज़रूरी है।' ऐसा कहना हमारे लिए, ईश्वर के चोर बनने जैसा हो जाता है। हमें ईश्वर के सिवा और किसी की ज़रूरत है, ऐसा कहना स्वराज्य तो सबको ठीक नहीं है और साधारण विचार करने से भी हमें लगेगा अपने लिए पाना कि 'अंग्रेजों के बिना आज तो हमारा काम चलेगा ही चाहिए और सबको नहीं,' ऐसा कहना अंग्रेजों को अभिमानी बनाने जैसा उसे अपना बनाना होगा। चाहिए। दूसरे लोग अंग्रेज बोरिया-बिस्तर बाँधकर अगर चले जाएँगे, जो स्वराज्य दिला तो हिन्दुस्तान अनाथ हो जाएगा ऐसा नहीं मानना चाहिए। दें वह स्वराज्य नहीं अगर वे गये तो संभव है कि जो लोग उनके दबाव से है, बल्कि परराज्य चुप रहे होंगे वे लड़ेंगे, फोड़े को दबाकर रखने से कोई है। फायदा नहीं। उसे तो फूटना ही चाहिए। इसलिये अगर हमारे भाग्य में आपस में लड़ना ही लिखा होगा तो हम लड़ मरेंगे। उसमें कमज़ोर को बचाने के बहाने किसी दूसरे को बीच में पड़ने की ज़रूरत नहीं है। इसी से तो हमारा सत्यानाश हुआ है। इस तरह कमज़ोर को बचाना उसे और भी कमज़ोर बनाने जैसा है। मॉडरेटों को इस बात पर अच्छी तरह विचार करना चाहिए। इसके बिना स्वराज्य नहीं प्राप्त हो सकता। मैं उन्हें एक अंग्रेज पादरी के शब्दों की याद दिलाऊंगा: "स्वराज्य में अंधाधुंधी बरदाश्त की जा सकती है, लेकिन परराज्य की व्यवस्था हमारी कंगाली को बताती है।" सिर्फ़ उस पादरी के स्वराज्य का और हिन्दुस्तान के स्वराज्य का अर्थ अलग है। हम किसी का भी जुल्म या दबाव नहीं चाहते, चाहे वो गोरा हो या हिन्दुस्तानी हो। हम सबको तैरना सीखना और सिखाना है। अग़र ऐसा हो तो एक्स्ट्रीमिस्ट और मॉडरेट दोनों मिलेंगे, मिल सकेंगे, दोनों को मिलना चाहिए दोनों को एक-दूसरे का डर रखने की या अविश्वास करने की ज़रूरत नहीं है। पाठक : इतना तो आप दोनों पक्षों से कहेंगे, परन्तु अंग्रेजों से क्या कहेंगे ? संपादक : उनसे मैं विनय से कहूँगा कि आप हमारे राजा ज़रूर हैं। आप अपनी तलवार से हमारे राजा हैं या हमारी इच्छा से, इस सवाल की चर्चा मुझे 142

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