भारतकोश
हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)

हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)

Hind Swaraj by Mahatma Gandhi

मोहनदास करमचन्द गाँधी (महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished150 पृष्ठ

पृष्ठ 144, कुल 150 में से

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पृष्ठ 144

हिन्द स्वराज्य करने की ज़रूरत नहीं। आप हमारे देश में रहें इसका भी मुझे द्वेष नहीं है, लेकिन राजा होते हुए भी आपको हमारे नौकर बनकर रहना होगा। आपका कहा हमें नहीं, बल्कि हमारा कहा आपको करना होगा। आज तक आप इस देश से जो धन ले गये, वह भले आपने हज़्म कर लिया, लेकिन अब आगे आपका ऐसा करना हमें पसन्द नहीं होगा। आप हिन्दुस्तान में सिपाहीगरी करना चाहें तो रह सकते हैं। हमारे साथ व्यापार करने का लालच आपको छोड़ना होगा। जिस सभ्यता की आप हिमायत करते हैं, उसे हम नुकसानदेह मानते हैं। अपनी सभ्यता को हम आपकी सभ्यता से कहीं ज्यादा ऊंची समझते हैं आपको भी ऐसा लगे तो उसमें आपका लाभ ही हैं, लेकिन ऐसा न लगे तो भी आपको, आपकी कहावत के मुताबिक, हमारे देश में हिन्दुस्तानी होकर रहना होगा। आपको ऐसा कुछ नहीं करना चाहिए, जिससे हमारे धर्म को बाधा पहुँचे। राजकर्ता होने के नाते आपका फ़र्ज है कि हिन्दुओं की भावना का आदर करने के लिए आप गाय का माँस खाना छोड़ दें और मुसलमानों की खातिर बुरे जानवर (सुअर) का माँस खाना छोड़ दें। हम दब गये थे इसलिए बोल नहीं सके, लेकिन आप ऐसा न समझें कि आपके इस बर्ताव से हमारी भावनाओं को चोट नहीं पहुँची है। हम स्वार्थ या दूसरे भय से आज तक कह नहीं सके, लेकिन अब यह कहना हमारा फ़र्ज हो गया है। हम मानते हैं कि आपकी क़ायम की हुई शालाएँ और अदालतें हमारे किसी काम की नहीं हैं। उनके बजाय हमारी पुरानी असली शालाएँ और अदालतें ही हमें चाहिए। हिन्दुस्तान की आम भाषा अंग्रेजी नहीं बल्कि हिन्दी है। वह आपको सीखनी होगी और हम तो आपके साथ अपनी भाषा में ही व्यवहार करेंगे। आप रेलवे और फ़ौज के लिए बेशुमार रुपये ख़र्च करते हैं, यह हमसे देखा नहीं जाता। हमें उसकी ज़रूरत नहीं मालूम होती। रूस का डर आपको होगा, हमें नहीं है। रूसी आएँगे तब हम उनसे निबट लेंगे, आप होंगे तो हम दोनों मिलकर उनसे निबट लेंगे। हमें विलायती या यूरोपीय कपड़ा नहीं चाहिए। इस देश में पैदा होने वाली चीजों से ही हम अपना काम चला लेंगे। 143


दाहिनी ओर बॉक्स का पाठ: स्वराज्य में अंधाधुंधी बरदाश्त की जा सकती है, लेकिन परराज्य की व्यवस्था हमारी कंगाली को बताती है।' 'सिर्फ़ उस पादरी के स्वराज्य का और हिन्दुस्तान के स्वराज्य का अर्थ अलग है। हम किसी का भी जुल्म या दबाव नहीं चाहते, चाहे वो गोरा हो या हिन्दुस्तानी हो। हम सबको तैरना सीखना और सिखाना है।