भारतकोश
हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)

हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)

Hind Swaraj by Mahatma Gandhi

मोहनदास करमचन्द गाँधी (महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished150 पृष्ठ

पृष्ठ 145, कुल 150 में से

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हिन्द स्वराज्य आपकी एक आँख मैन्चेस्टर पर और दूसरी हम पर रहे, यह अब नहीं पुसायेगा। आपका और हमारा स्वार्थ एक ही है, इस तरह आप बरतेंगे तभी हमारा साथ बना रह सकता है। हम दब गये थे आपसे यह सब हम बेअदबी से नहीं कह रहे हैं। इसलिए बोल नहीं आपके पास हथियार-बल है, भारी जहाजी सेना है। सके, लेकिन आप उसके ख़िलाफ़ वैसी ही ताक़त से हम नहीं लड़ ऐसा न समझें कि सकते, लेकिन आपको अगर ऊपर कही गई बात आपके इस बरताव से मंजूर न हो, तो आपसे हमारी नहीं बनेगी। आपकी हमारी भावनाओं को मर्जी में आये तो और मुमकिन हो तो आप हमें तलवार चोट नहीं पहुँची है। हम से काट सकते हैं, मर्जी में आये तो हमें तोप से उड़ा स्वार्थ या दूसरे भय से सकते हैं। हमें जो पसंद नहीं है वह अगर आप करेंगे, आज तक कह नहीं तो हम आपकी मदद नहीं करेंगे और बगैर हमारी मदद सके, लेकिन अब यह के आप एक कदम भी नहीं चल सकेंगे। कहना हमारा फ़र्ज हो संभव है कि अपनी सत्ता के मद में हमारी इस बात गया है। को आप हँसी में उड़ा दें। आपका हँसना बेकार है, ऐसा आज शायद हम नहीं दिखा सकें, लेकिन अगर हममें कुछ दम होगा तो आप देखेंगे कि आपका मद बेकार है और आपका हँसना विनाश की निशानी है। हम मानते हैं कि आप स्वभाव से धार्मिक राष्ट्र की प्रजा हैं। हम तो धर्म स्थान में ही बसे हुए हैं। आपका और हमारा कैसे साथ हुआ, इसमें उतरना फ़िजूल है, लेकिन अपने इस सम्बन्ध का हम दोनों अच्छा उपयोग कर सकते हैं। आप हिन्दुस्तान में आने वाले जो अंग्रेज हैं वे अंग्रेज प्रजा के सच्चे नमूने नहीं हैं और हम जो आधे अंग्रेज जैसे बन गये हैं वे भी सच्ची हिन्दुस्तानी प्रजा के नमूने नहीं कहे जा सकते। अंग्रेज प्रजा को अगर आपकी करतूतों के बारे में सब मालूम हो जाए, तो वह आपके कामों के ख़िलाफ़ हो जाए। हिन्द की प्रजा ने तो आपके साथ संबंध थोड़ा ही रखा है। आप अपनी सभ्यता को, जो दरअसल बिगाड़ करने वाली है, छोड़कर अपने धर्म की छानबीन करेंगे, तो आपको लगेगा कि हमारी माँग ठीक है। इसी तरह आप हिन्दुस्तान में रह सकते हैं। अगर उस ढंग से आप यहाँ रहेंगे तो आपसे हमें जो थोड़ा सीखना है वह हम सीखेंगे और हमसे आपको जो बहुत सीखना है वह आप 144