हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)

हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)
Hind Swaraj by Mahatma Gandhi
मोहनदास करमचन्द गाँधी (महात्मा गाँधी) द्वारा
DevanagariHindipublished150 पृष्ठ
पृष्ठ 27, कुल 150 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 27
हिन्द स्वराज इन्सान नींद में से उठता है तो अंगड़ाई लेता है, इधर- उधर घूमता है और अशान्त रहता है। उसे पूरा भान आने में कुछ वक्त लगता है। उसी तरह अगर ये बंग- भंग से जागृति आई है, फिर भी बेहोशी नहीं गई है। अभी हम अंगड़ाई लेने की हालत में हैं। असंतोष होना ही चाहिए। चालू चीज से ऊब जाने पर ही उसे फेंक देने को मन करता है। ऐसा असंतोष हममें महान हिन्दुस्तानियों की और अंग्रेज़ों की पुस्तकें पढ़कर पैदा हुआ है। उस असंतोष से अशान्ति पैदा हुई और उस अशान्ति में कई लोग मरे, कई बरबाद हुए, कई जेल गये, कई को दश निकाला हुआ। आगे भी ऐसा होगा और होना चाहिए। ये सब लक्षण अच्छे माने जा सकते हैं। इनका नतीजा बुरा भी आ सकता है। 26