भारतकोश
हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)

हिन्द स्वराज (आत्म-निर्भरता एवं स्वराज्य दर्शन)

Hind Swaraj by Mahatma Gandhi

मोहनदास करमचन्द गाँधी (महात्मा गाँधी) द्वारा

DevanagariHindipublished150 पृष्ठ

पृष्ठ 70, कुल 150 में से

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पृष्ठ 70

हिन्द स्वराज लिखने की आदत है, हर एक जाति के रीति-रिवाज जानने का वे दंभ करते हैं। ईश्वर ने हमारा मन तो छोटा बनाया है, फिर भी वे ईश्वरी दावा करते आये हैं और तरह-तरह के प्रयोग करते हैं। वे अपने बाजे खुद बजाते हैं और हमारे मन में अपनी बात सही होने का विश्वास जमाते हैं। हम भोलेपन में उस सब पर भरोसा कर लेते हैं। जो टेढ़ा नहीं देखना चाहते वे देख सकेंगे कि कुरान शरीफ़ में ऐसे सैकड़ों वचन हैं, जो हिन्दुओं को मान्य हों, भगवद् गीता में ऐसी बातें लिखी हैं कि जिनके ख़िलाफ गाय को दुःख देकर मुसलमान को कोई भी ऐतराज नहीं हो सकता। हिन्दू गाय का वध करता कुरान शरीफ़ का कुछ भाग मैं न समझ पाऊँ या है, इससे गाय को कौन कुछ भाग मुझे पसंद न आए, इस वजह से क्या मैं छुड़ाता है? जो हिन्दू गाय उसे मानने वाले से नफ़रत करूँ? झगड़ा दो से ही की औलाद को पैना हो सकता है। मुझे झगड़ा नहीं करना हो तो (आर) भोंकता है, उस मुसलमान क्या करेगा? और मुसलमान को झगड़ा हिन्दू को कौन समझाता न करना हो तो मैं क्या कर सकता हूँ? हवा में हाथ है? इससे हमारे एक राष्ट्र उठाने वाले का हाथ उखड़ जाता है। सब अपने- होने में कोई रुकावट अपने धर्म का स्वरूप समझकर उससे चिपके रहें नहीं आई है। और शास्त्रियों तथा मुल्लाओं को बीच में न आने दें तो झगड़े का मुँह हमेशा के लिए काला ही रहेगा। पाठक : अंग्रेज दोनों क़ौमों का मेल होने देंगे? संपादक : यह सवाल डरपोक आदमी का है। यह सवाल हमारी हीनता को दिखाता है। अगर दो भाई चाहते हों कि उनका आपस में मेल बना रहे, तो कौन उनके बीच में आ सकता है? अगर तीसरा आदमी दोनों के बीच झगड़ा पैदा कर सके, तो उन भाइयों को हम कच्चे दिल के कहेंगे। उसी तरह अगर हम हिन्दू और मुसलमान कच्चे दिल के होंगे, तो फिर अंग्रेजों का कुसूर निकालना बेकार होगा। कच्चा घड़ा एक कंकड़ से नहीं तो दूसरे कंकड़ से फूटेगा ही। घड़े को बचाने का रास्ता यह नहीं है कि उसे कंकड़ से दूर रखा जाए, बल्कि यह है कि उसे पक्का बनाया जाए, जिससे कंकड़ का भय ही न रहे। उसी तरह हमें पक्के दिल के बनना है। हम दोनों में से कोई एक भी 69