हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)
Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar
विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा
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असफल करके हमारी रक्षा करें। सदाशिवराव भाऊ ने, जो ऐसे ही समय की प्रतीक्षा में था और चाहता था कि हैदरअली को परास्त करके सारे दक्खिन को मुक्त कराये, फौरन ही हैदरअली पर चढ़ाई करने के विचार से रवाना होने का निश्चय कर लिया, पर उसी समय पेशवा के यहां उत्तर से बड़ी बुरी खबर आई। भाऊ लिखता है, कि सफलता का प्याला, जिसे मैं मुँह से लगाने ही वाला था, मेरे हाथ से छीन लिया गया। जो मरहठा फौज दत्ताजी की अध्यक्षता में उत्तर की ओर गई थी, वह १७५८ ई० के अन्त में दिल्ली पहुँची जहां से पेशवा की आज्ञानुसार नवीन विजित लाहौर और मुल्तान के सूबों का प्रबन्ध करने के लिये वह आगे बढ़ा। मावा जी शिन्दे और त्रिम्बक बापूजी को अटक तक का प्रबन्ध करने के लिये नियत करने के बाद उसने लाहौर, सरहिन्द तथा अन्य प्रसिद्ध स्थानों में सेनायें रक्खीं। अब पंजाब का काम सम्पूर्ण हो जाने के कारण वह वहां से चला आया और अपने सुपुर्द किये गये दूसरे काम के लिये गंगा पार करके पटना पहुँचा, जहां उसने अंग्रेजों के साथ हिसाब चुकाने के पश्चात् हिन्दू-राज्य को समुद्र-तट तक फैलाना था। सींधिया द्वारा पराजित नजीबखां, जिसने दत्ताजी को बंगाल की लड़ाई में सहायता देने तथा विश्वासपूर्वक सेवा करने की झूठी प्रतिज्ञा की थी, धीरे धीरे अपनी शक्ति और प्रभाव को बढ़ा रहा था। इस पर क्रोधित होकर पेशवा ने दत्ताजी को लिखा, “तुम कहते हो कि अगर हम नजीबखां को 'बख्शी' बना दें तो वह हमें तीस लाख रुपया देगा, किन्तु मैं आज्ञा देता हूँ कि उसका एक पैसा भी न छूना। नजीबखां आधा अब्दाली है, उसका विश्वास न करो और एक नीच जहरीले सांप को न पालो।” पर दत्ताजी ने पेशवा की इस आज्ञा की अवहेलना करके बड़ी भारी भूल की। वह उसकी छटी मक्कारी पर ऐसा