भारतकोश
हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar

विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा

DevanagariHindipublished254 पृष्ठ

पृष्ठ 109, कुल 254 में से

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पृष्ठ 109

[ १०६ ] सलामी देने को टूट पड़े। तथ सेनापति के पीछे सेनापति, सरदार, गवर्नर और वाइसराय नम्रतापूर्वक आगे बढ़े और अपने राजकुमार का हार्दिक अभिनन्दन किया, ठीक उसी प्रकार जैसा कि जाति का सभापतित्व ग्रहण करने वाले बादशाह का करते हैं, उसका विजेता के रूप में आदर किया। उस अद्भुत दृश्य के वालों ने उसका अर्थ समझ लिया। इसमें भाग लेने वाले प्रत्येक ने अनुमान किया कि यह उस बड़े राज्य-तिलक दरबार का पूर्व (रिहर्सल) है, जिसमें, अगर ईश्वर ने चाहा तो, इस नवयुवक • कुमार को सारे भारतवर्ष के महाराजाधिराज-पद से विभू- किया जायगा। १४ पानीपत मुसलमान भी दिल्ली की इस महान् कार्यवाही का अर्थ समझने से वञ्चित न रहे। यह समाचार अग्नि की तरह चारों ओर गया कि मरहठों ने अपने राजकुमार को समस्त भारतवर्ष का महा- राजाधिराज अभिषिक्त किया है। नजीबखां और दूसरे मुसलमान- नेताओं ने इन कार्यों की ओर इशारा करके अपने डर को न्यायोचित सिद्ध किया और मुसलमानों को इस गम्भीर परिस्थिति का बोध कराने का उद्योग किया। उन्होंने जोरदार शब्दों में घोषणा की कि हिन्दू- पद-पादशाही ही नहीं, “ब्राह्मण-पद-पादशाही' भी स्थापित हो गयी है, इसलिए प्रत्येक मुसलमान, जो अपने नबी का सच्चा भक्त है काफिरों की सेना से लड़ने के लिए रणक्षेत्र में उतर आये। परन्तु नजीबखां और अन्यान्य मौलवियों की तरंगभरी, जोश में लाने वाली, इस्लाम के नाम पर की गई वक्तृताओं की अपेक्षा, शुजां और दूसरे मुसलमानों के स्वार्थ-भाव का पलड़ा अधिक भारी रहा।