हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)
Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar
विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा
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को टुकड़े टुकड़े करने में आनाकानी की थी ? फिर वे क्यों मुगलसिंहा- सन के लिये इतने चिंतित हो रहे थे जो समस्त हिन्दुओं के लिये जिनमें जाट भी सम्मिलित हैं-केवल एक शैतानी शक्ति का चिन्ह था। जो सहस्रों हिन्दू-शहीदों के खून से लिप्त तथा उनके मन्दिरों और घरों को नष्ट करके बनाया गया था और जिसका अस्तित्व ही हिन्दुओं की जातीय और राज- नैतिक मृत्यु थी। औरङ्गजेब ने हिन्दुत्व के शाही तख्त को टुकड़े टुकड़े करने के लिये अपना फौलादी पंजा उठाया था, उस समय न्यायशील देवता तथा हिन्दुस्तान के रक्षक स्वर्गीय दूत ने उसके हाथ से हथौड़ा छीन लिया—और देखो, आज उसी का शाही तख्त इसके नीचे टुकड़े- टुकड़े होकर पड़ा है । सिपाहियों की तनख्वाह चुकाने के बाद, भाऊ कुंजपुर के लिये आगे बढ़ा । शिन्दे, होल्कर और विठल शिवदेव सेनापति थे । पठान बड़ी वीरता से लड़े । क़िला और शहर अपनी मज़बूती के लिए प्रसिद्ध थे, लेकिन अच्छी तोपों तथा सिंधिया और अन्यान्य सेनापतियों द्वारा संचालित महाराष्ट्र-फौज का मुसलमान देर तक सामना न कर सके । मुसलमानी सेना के बीच कुछ शिगाफ़ होते ही दामाजी गायकवाड़ ने 'हर हर' जयघोष के बीच अपनी सेना को आगे बढ़ने की आज्ञा दी और उसकी सेना अन्धा-धुन्ध घोड़े दौड़ाती हुई उसके बीच कूद पड़ी । भीषण युद्ध हुआ जिसमें खून की नदियां बहीं । सहस्रों पठान मारे गये । क़िला ले लिया गया । मुसलमानों के खेमे लूट लिये गये और उनके सैंकड़ों आदमी पकड़ लिये गये । उनका सेनापति समदखां भी मरहटों के हाथों में गिरफ्तार हो गया । वह एक बार पहले भी पिछले युद्ध में रघुनाथराव द्वारा बन्दी किया गया था, पर मरहटों ने रुपया लेकर उसे छोड़ दिया था । छूटने के पश्चात् उसने जान की परवाह न करके मरहटों का विरोध किया और एक फिर उनके हाथ में पड़ गया । युद्ध-समाप्ति पर भाऊ खड़ा २ होल्कर और सिंधिया को कुछ