भारतकोश
हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar

विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा

DevanagariHindipublished254 पृष्ठ

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दिया और उनके ८००० आदमियों को मार डाला। भारी प्रहार को न सह कर यवन-सेना का दाहिना भाग लड़खड़ाने लगा और पीछे हटा। मुसलमानों की सेना के मध्य भाग पर भाऊ और नवयुवक वीर विश्वास- राव ने इस ज़ोर से आक्रमण किया कि सेनायें मौत के मुख में आ पड़ीं। पठान भी घटये दर्जे के शत्रु न थे। दूसरी ओर भाऊ तथा नवयुवक राज- कुमार विश्वासराव जैसे असाधारण पुरुषों द्वारा संचालित महाराष्ट्र-सेना भी सम्भवतः पीछे हटना नहीं जानती थी। एक घण्टे के भयंकर युद्ध के बाद भाऊ और विश्वासराव ने स्वयं वज़ीर द्वारा संचालित और लोहे की तरह मजबूत पठानों के अग्रभाग की पंक्ति को तोड़ दिया। सहस्रों मुसलमान रणमें मरकर धराशायी हुए। वज़ीर का लड़का मारा गया और वह स्वयं घोड़े से वंचित हो गया। मुसलमानों का मध्य भाग टूटने और छिन्न-भिन्न होने लगा। शत्रुओं के मोर्चे पर मोर्चे को तोड़ते हुये भाऊ और विश्वासराव आगे बढ़े। यह देखकर वज़ीर को बचाने के लिये नजीबखां शीघ्रता से आगे बढ़ा। पर उसके पीछे भाऊ की सहा- यता और उसकी स्थिति मजबूत करने के लिये वीर जनकोजी भी अपने अनुभवी योद्धाओं के साथ तेज़ी से आ पहुँचा। इतनी भयंकर लड़ाई होने लगी जितनी पहले कभी नहीं हुई थी। समस्त सेना में द्वन्द- युद्ध होना आरम्भ हो गया। अब्दाली को स्पष्ट प्रतीत हो गया कि उसकी सेना का दाहिना, बायां और मध्य—अर्थात् सारी सेना पीछे हट गई है, और शीघ्र ही तितर-बितर होना चाहती है। जल्द ही उसके सिपाही भागने लगे। पर वह अटल खड़ा रहा। उसने अपनी ही फ़ौज को आज्ञा दी कि जो लोग अपना स्थान छोड़ कर भागते हैं, उन्हें मार दो। प्रातः ८ बजे युद्ध प्रारम्भ हुआ था और अब दो बज चुके थे। पर उस समय से लेकर अब तक यह भयंकर युद्ध एक क्षण के लिये भी न रुका। रणक्षेत्र में लहू की नदी बह निकली। मरते हुओं और घायलों की भयानक चिल्लाहट और कराहने की आवाज़, मारू बाजों तथा