हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)
Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar
विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा
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उनका राज्य-प्रबन्ध भी न्यायपूर्ण और सर्वप्रिय था । उनके शासन-काल को मरहठे अब भी धन्यवादपूर्वक स्मरण करते हैं । महाराज शिवाजी के हिन्दू-पद-पादशाही स्थापित करने के उद्देश्य को कार्य-रूप में परिणत करने का कार्य उन्हीं के करने के लिये सुरक्षित पड़ा था । वास्तव में उन्होंने ही सारे भारतवर्ष को यवनों के पंजे से मुक्त कराया । उनके राज्य काल में, पृथ्वीराज की पराजय के बुरे दिन के छः सौ वर्ष पश्चात, आज हिन्दू-गौरव सबसे ऊँची चोटी पर पहुँच पाया था । निस्सन्देह यदि वे संसार मे अपने समय के सबसे बड़े आदमी नहीं, तो भी महान् व्यक्तियों में से अवश्य थे । बालाजी-उपनाम नानासाहब-की असामयिक मृत्यु से जो राष्ट्र को हानि हुई वह पानीपत की लड़ाई की हानि से यदि अधिक न थी तो उस से किसी अंश में कम भी न थी । ये दो बड़े भयानक आघात इस जाति पर एक साथ पड़े । इन घटनाओं से जो राष्ट्र को धक्का लगा उसकी क्षति-पूर्ति के लिए कुछ समय लगा ।
१६ धर्मवीर माधोराव ॐध्रुवमधिपतिर्बालावद्गोप्यत्वं परिचितुम् । न खलु वयसा नात्येवायं स्वकार्य सहोद्भरः ॥ नानासाहब की मृत्यु के पश्चात् मरहठों को नेताविहीन देखकर और यह विचार करके कि पानीपत की लड़ाई में हार होने के कारण महाराष्ट्र-मण्डल नष्ट हो जाएग, शत्रु लोगों ने सिर उठाया और चारों ओर से उसे घेर लिया । हैदरअली को अवसर मिल गया और उसने मैसूर के राज्य को हिन्दू-राजा के हाथ से छीन लिया तथा मरहठों के दक्खिन राज्य पर आक्रमण किया । निजाम
ॐयह व्यक्ति बालक होता हुआ भी स्वामी बनकर राज्य को संभाल सकता है । यद्यपि इसकी आयु छोटी है तो भी यह स्वभाव से ही अपने राज्य का कार्य भार उठा सकता है ।