हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)
Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar
विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंके विरुद्ध बगावत की। संसार की कोई वस्तु रघुनाथराव की शक्तिशाली होने की इच्छा को नहीं दबा सकती थी और जिस पद के लिये वह प्रयत्न कर रहा था, उस के लिये वह सर्वथा अयोग्य था। उसने स्वतन्त्र रूप से अपने भतीजे के विरुद्ध विधर्मियों के राजा की सहायता करने के नीच उपाय का अवलम्बन किया और जब कभी लड़ाई मे हारकर पकड़ा जाता और कैद किया जाता तो अन्न-जल छोड़ भूखों मर जाने की धमकी देता तथा इसी प्रकार की और बातें करता रहता। मुग़ल- राज्य के इस प्रकार के आपत्तिजनक दावेदार के भाग्य का निर्णय एक क्षण में ही, एक बूंद ज़हर देकर या उसके बदन में हंसी हंसी में एक तीखी तलवार घुसेड़कर अथवा पेशवा के दो अश्रुबिंदुओं के कारण हो सकता था। किन्तु यह नवयुवक ब्राह्मण-राजकुमार सज्जनता और धर्म की मूर्ति था। उसने अपने चचा रघुनाथराव को, उसके राज्य के बांट देने के प्रस्ताव पर, यहा तक लिख दिया कि,-"चचा ! आप राज्य बांटने के लिये कहते हैं, किन्तु सोचिये कि इस बड़े राज्य का मालिक कौन है ? क्या यह किसी की निजी सम्पत्ति है ? सहस्रों शूरवीर तथा राजनीतिज्ञों ने इसे इतना बड़ा और प्रभावशाली बनाने के लिये प्राण- पण से कार्य किया है। राज्य की बागडोर सदैव एक पथ-प्रदर्शक के हाथ में रहनी चाहिये। लेकिन यदि इसे बांटकर खण्ड-खण्ड करके भिन्न- भिन्न राज्य बना दिये जाय तो क्या ये राज्य इस प्रकार अपने प्रभाव और शक्ति को अक्षुण्ण रख सकेंगे ? मैं सोचता हूँ कि ऐसा कभी नहीं हो सकता। इसको बांटकर शक्तिहीन बनाने की अपेक्षा मैं यह अधिक अच्छा समझता हूँ कि मैं अपने आप को इससे बिल्कुल पृथक् करलूं और आप को बिना किसी प्रतिद्वन्द्विता के इस राष्ट्र-मण्डल का नेता बना दूं। मैं अधिनायक के दावे को सर्वथा त्यागकर आप की सेना में एक सिपाही के रूप मे भर्ती हो जाऊंगा। जो कुछ आप मुझे निर्वाह के लिये दोगे उसी पर अपना निर्वाह करूंगा; किन्तु मैं आनेवाली सन्तान के सामने अपनी गणना ऐसे व्यक्तिके रूपमें नहीं कराना चाहता जिसने अपने