हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)
Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar
विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा
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हजार हथियारबन्द मुसलमान-सेना तैयार थी। परन्तु मरठों ने उनकी संख्या पर कुछ भी ध्यान न दिया, और घमसान की लड़ाइयां छिड़ ग जिनमें बड़ी निर्दयता के साथ पठान और रुहेले काटे गये। तत्पश्चात क़िले-पर-क़िला, शहर-पर-शहर शत्रुओं के हाथ से छीनते गये और द्वाबे को पठानों से साफ कर दिया। और आगे बढ़ कर रुहेलखण्ड आक्रमण कर दिया और रुहेलों का भी—पठानों की तरह बड़ी [..] से नाश कर दिया। मृत्यु ने नजीबखां को मरठों की क्रोधाग्नि से लिया था, लेकिन उसका पुत्र जवेथखां अभी तक अपने पिता के अपने पापों का प्रायश्चित् करने को बचा हुआ था। उसने शुक्रताल के क़िले की अभेद दीवारों के पीछे शरण ली। मरठों ने सीधा क़िले पर आक्रमण किया और उस पर भयंकर गोलाबारी करनी आरम्भ दी। उन्होंने क़िले के भीतर के सैनिक विभाग को ऐसे नष्ट किया कि जवेथखां उसकी रक्षा करने में असमर्थ हुआ। अन्त को एक रात चुपके से भाग निकला और गंगा को पार करके बिजनौर पहुँच गया। यह समाचार पाकर मरठों की बदला लेने वाली सेना भी बिजनौर ओर चल पड़ी और गंगा को पार करती हुई बिजनौर पहुँची। यहाँ जवेथखां के क़िले की रक्षा के लिये तोपखाने नियुक्त थे। ये मरठों पर गोलियां बरसाने लगे परन्तु मरठों ने तोपखाने पर कर लिया और उन दोनों शक्तिशाली सेनाओं को, जो उन्हें रोकने कर रहीं थी, परास्त किया और हज़ारों रुहेलों को मौत के पार उतारत हुये बिजनौर में जा घुसे। सारा ज़िला उनके घोड़ों की टापों से [..] जाने लगा। जवेथखां भाग कर नजीबगढ़ पहुँचा। मरठों ने वहां तक उसका पीछा किया और फतेहगढ़ पर भी अधिकार कर लिया। यहां पर उन्हें अपार प्रसन्नता हुई, क्योंकि मरठों का जो सामान पानीपत की लड़ाई में पठान और रुहेलों के हाथ चला गया था, वह सब अब पुनः विजयी मरठों के हाथ आ गया। अब उनको पूर्णरूप से विजय प्राप्त हो गई थी। जवेथखां की स्त्री और बच्चों को भी मरठों ने पकड़ लिया।