भारतकोश
हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar

विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा

DevanagariHindipublished254 पृष्ठ

पृष्ठ 163, कुल 254 में से

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पृष्ठ 163

[ १६५ ] इसलिये अंग्रेज़ी सेना शीघ्र ही पूना के लिये चल पड़ी ताकि वह नाना तथा उनके साथियों को भयभीत करके उनके हाथ से हथियार रखवाले । लेकिन महाराष्ट्र के उस निपुण राजनीतिज्ञ नाना ने पहिले ही अंग्रेजों को फंसाने के लिये सारे भारतवर्ष में एक भयंकर जाल बुन लिया था । उसने हैदरअली से मद्रास और भोंसले से बंगाल पर आक्रमण करने की प्रतिज्ञा ले ली थी, और अपने हाथ में उसने बम्बई में अंग्रेजों की शक्ति को नष्ट करने का काम लिया । तदनुसार हैदरअली नेफ्रांस गवन- र्मेण्ट की सहायता से मद्रास में सुविख्यात सफलता प्राप्त की । परशराम भाऊ १२ सहस्र सेना के साथ उस अंग्रेज़ी सेना के इर्द गिर्द मंडराता हुआ उनकी बगलों और पीछे वाली सेना पर आक्रमण करता हुआ उनको पूना की ओर प्रगति में बाधायें डालता रहा । नाना, तुकोजी होल्कर और हरिपन्त पाडके ने तीस सहस्र सेना लेकर अंग्रेज़ी सेना का सामना किया । अब जनरल गोडार्ड ने भी अपने आप को जनरल एज- रटन की अवस्था में फंसा हुआ पाया । यदि वह आगे बढ़ता तो उसे भी अपने पूर्ववर्ती जनरल की तरह दुर्भाग्य का शिकार होना पड़ता, तो भी यह इतना आगे बढ़ आया था कि अब पीछे लौट जाना उस के लिये हानिकारक और अपमानजनक था । इस लिये वह उसी जगह पर जम कर अपनी शक्ति बढ़ाने लगा । लेकिन वह इस प्रकार भी देर तक न कर सका । मरठों ने कैप्टन मैके और करनैल ब्राउन को, जो गोडार्ड को सामान पहुंचा रहे थे, आक्रमण करके हैरान कर दिया और ऐसी स्थिति पैदा कर दी कि अंग्रेज़ी सेना का सम्बन्ध ही बम्बई से टूट गया । अन्त में निराश होकर करनैल गोडार्ड को पूना पर धावा करने का विचार त्याग कर लौट जाने का निश्चय करना पड़ा । ज्यों ही निराश होकर अंग्रेज़ी सेना ने पीछे की ओर मुड़कर चलना आरम्भ किया त्योंही भाऊ और तुकोजी होल्कर अपनी सेना का घेरा तंग करके उन पर टूट पड़े । यद्यपि अंगरेज़ बड़ी शूरता और वीरता के साथ लड़े तथापि मरहठों ने उन्हें बुरी प्रकार हराया । जो सेनापति मरहठों की राजधानी