हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)
Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar
विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें[ १६८ ] करने में तत्पर हुआ जिनको छोड़ने के लिये इसका पिता विवश किया गया था । यह महाराष्ट्र की स्वाधीनता को एक ठीकरे के मूल्य पर बेचकर महाराष्ट्र-राज्य के नाश का कारण हुआ । लेकिन जब तक नाना फड़नवीस और महादजी जीवित थे, तब तक ऐसा नहीं हो सका था । ———— २०. सर्व-प्रिय पेशवा—सवाई माधोराव ꕤदैन्य दिवस आज सरले सवाई माधवराव प्रतापि कलियुगिं अवतरले ॥धृ०॥ सुन्दररुप रायाचें कुणावर नाहिं रागें भरतों ॥ कलगितुरा शिरपेंच पाचुचीं पडत होति मुखावर किरणें ॥ महोत्साह घरोघर लागले लोक करायाला ॥ परशराम प्रत्यक्ष आले जणुं छत्र धारायाला ॥ नाना और महादजी क्रमशः हिन्दू-धर्म के मस्तिष्क और तलवार थे । वे महाशक्तिशाली राज्य का विशाल भार अपने प्रशांत कंधों पर उठाने के लिये ही उत्पन्न हुये थे । इङ्गलैण्ड, फ्रांस, हालैण्ड और पुर्तगाल ने राज्य-स्थापन के लिये जितने भी राजनीतिज्ञ भेजे उनमें से कोई भी इन दोनों महापुरुषों को बल और बुद्धि में नीचा न दिखा सका । हेस्टिंग्स, वेलजली और कार्नवालिस की उनके सामने एक भी न चली । दोनों ने ही हिन्दू-राज्य के बढ़ते हुये वैभव को देखा था । दोनों ने ही महाराष्ट्र ———————————————————————————————— ꕤ प्रतापवान् सवाई माधोराव कलियुग में पैदा हुये तब, हमारी दरिद्रता के दिन समाप्त हो गये यह परम-सुन्दर और शान्त स्वभाव थे । सिर पर मणि जड़ित कलगी की ज्योति उनके मुख पर पड़ती थी । घर-घर खुशियां मनायी जाने लगीं और लोग यह समझने लगे कि साक्षात् परशुराम राज्य सम्भालने के लिये पैदा हुये हैं ।