भारतकोश
हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar

विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा

DevanagariHindipublished254 पृष्ठ

पृष्ठ 167, कुल 254 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 167

[ १६६ ]

की नीति, उसका, उद्देश्य, और अपने कर्त्तव्य की शिक्षा नानासाहब और सदाशिवराव भाऊ से पाई थी। दोनों ने ही पानीपत का मैदान देखा था और वहां से लौटकर उस रक्त-रञ्जित भूमि पर पड़े हुये वीर पुरुषों के उद्देश्य को पूरा करने का उन्होंने दृढ़ निश्चय किया था। उस पर उन्हें ऐसे राज्य का भार उठाना पड़ा जो उस समय गृह-कलह से जर्जर हो रहा था; जो नाश के तट पर खड़ा था। जिसका राजा भी नाम मात्र का था, और जिसका प्रधान मंत्री था एक निर्बोध बालक; और जिसको नष्ट करने के लिए एक महा-शक्तिशाली यूरोपीय शत्रु अपनी राज्यलिप्सा के लिये समग्र शक्तियों का उपयोग कर रहा था। फिर भी उन्होंने अदम्य उत्साह और विलक्षण बुद्धि से सम्पूर्ण कठिनाइयों का सामना किया; राज्य के सब विद्रोहियों को शान्त किया और अपने विशाल बाहुबल तथा सुदूरदर्शिता से समस्त यूरोपीय और एशियाई शत्रुओं को पराजित करके नीचा दिखाया।

राज्य की दशा सुधारने के लिये उन्हें एक ऐसी क्रांति पैदा करने तथा उसे संयत रखने का कठिन उत्तरदायित्व लेनापड़ा, जिसका परिणाम बिल्कुल अनिश्चित था। किन्तु इस क्रांति ने सारे शत्रुओं और सरकार पर विजय पाई। अतः यह सर्वथा स्वाभाविक और राजनीति के अनुकूल था कि इस विजय को किसी महोत्सव द्वारा संसार को विदित कराया जाता। बालक पेशवा—सवाई माधोराव—का विवहोत्सव इस राष्ट्रीय आनन्द को मानने के लिये अत्यन्त उपयुक्त अवसर था। वह प्रजा का मनोनीत था, उसी के लिये राष्ट्र ने युद्ध भी ठाना था। जिस पेशवा की हत्या के लिये शत्रुओं ने युद्ध ही नहीं किया वरन उसे गुप्त और नीच प्रयत्नों द्वारा विष देकर मार भी डालना चाहा, आज उसे सब संकटों से सुरक्षित पाकर राष्ट्र के आनन्द का क्या ठिकाना ! जिस प्रकार कंस के अत्याचारों से कृष्ण को सुरक्षित पाकर गोकुल वालों ने आनन्द मनाया था, उसी प्रकार सारी प्रजा अपने प्यारे पेशवा को जीवित पाकर आनन्द में मग्न हो गई। इस राजकीय महोत्सव में सम्मिलित होने के