भारतकोश
हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar

विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा

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उसके वसूल करने की विधि, न्यायालयों में छोटे बड़े सबके साथ समान व्यवहार का समुचित प्रबन्ध; और इन सबके उपरान्त लोगों को यह अनुभव कराना कि उस महान कर्त्तव्य की पूर्ति, जिस के लिये उनके पिता-पिता- मह और देवताओं तक ने अपना रक्त बहाया था, कितनी आवश्यक है; और उनका संबन्ध एक ऐसी जाति से है जो हिन्दू-धर्मकी रक्षा और स्वा- धीनता के लिये अपने विशाल कन्धे पर एक महान राष्ट्र का वहन कर रही है—इन सब विचारों को लेकर कोई भी हिन्दू ऐसा न था जो ऐसे शुभ समय में पैदा होने में अपना अहोभाग्य न समझता हो। राष्ट्र का प्रत्येक व्यक्ति एक ऊंची भावना से प्रभावित हो रहा था। नित्य प्रति एक-न-एक विजय अथवा कोई अन्य शुभ समाचार पहुंचता ही रहता था। तुच्छ-से-तुच्छ मनुष्य भी इस देश के लिये यह अत्यन्त गौरव का समय समझता था, और उसके विचार में यह सारी उन्नति बालक पेशवा सवाई माधोराव के शुभ-ग्रह की कृपा का ही परिणाम थी। यह प्रसिद्ध जनश्रुति थी कि स्वयं पहले माधोराव पेशवा ने ही मुस्लिम तथा अन्य विदेशी अत्याचारियों को नष्ट करके आसमुद्र शक्तिशाली हिन्दू-साम्राज्य- स्थापन की इच्छा पूर्ण करने के लिये दूसरे माधोराव के रूप में जन्म ग्रहण किया है। यही कारण था कि जब से बालक पेशवा का जन्म हुआ, राष्ट्रीय झण्डे पर भाग्यदेवी की सदैव कृपा रहती थी। ऐसे प्रच- लित अन्धविश्वास भी कभी २ राष्ट्र की आत्मा के अस्पष्ट उद्गार होते हैं और राष्ट्रीय कार्यों एवं उसकी विजयों पर उनका प्रभाव भी कम नहीं पड़ता। सालबाई के सुलहनामे के पश्चात् ही नाना ने हैदरअली के उत्तरा- धिकारी और महाराष्ट्र के भयानक शत्रु टीपू को ठीक करने के लिये परशुराम भाऊ और पटवर्धन को आज्ञा दी। सन् १७८४ ई० में युद्ध के कारण उपस्थित होने लगे। टीपू ने नारगुन्द के हिन्दू-राज्य पर अत्या- चार करना प्रारम्भ कर दिया और राजा ने मरहठों से सहायता मांगी। पटवर्धन और होल्कर के सेनापतित्व में निज़ाम की सहायता से मरहठों