भारतकोश
हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar

विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा

DevanagariHindipublished254 पृष्ठ

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[ १८२ ] को इसके लिये उन्हें दोषी ठहराने का कोई हक़ न था। पर हिन्दू तो इसलिये आ रहे हैं कि बादशाह उसके परिवार और दिल्ली निवासियों की उन्हीं के सहधर्मियों के अन्याय और अत्याचार से रक्षा करें ! समस्त नगरनिवासी मरहठों के आगमन के लिये ईश्वर से प्रार्थना कर रहे थे और उनके पहुंचने पर क्या हिंदू क्या मुसलमान—सबने एक हृदय होकर उन का स्वागत किया। अलीजा बहादुर, अप्पा खांडेराव, रानाखां और डी बोइन ने शहर पर अधिकार कर लिया। लेकिन जब उन्हें मालूम हुआ कि गुलामक़ादिर पहले ही भाग गया है तो वे बड़े दुःखी हुए, क्योंकि वह नजीबखां का पोता और मरहठों का स्वाभाविक शत्रु था, और उसे कुछ दण्ड न मिले उन्हें बिल्कुल नापसन्द था। मरहठों ने औरङ्गजेब की सन्तानों के सुख के लिये मनुष्योचित समस्त उपायों का उपयोग किया, यद्यपि इसी परिवार ने मरहठों के सत्यानाश के लिये, गुलाम- क़ादिर के साथ मिलकर षड्यन्त्र रचा था। गुलामक़ादिर का पीछा करने के लिये एक बड़ी सेना पहले ही भेजी जा चुकी थी। वह भाग कर मेरठ के किले में छिपा हुआ अपनी रक्षा करने का विचार कर रहा था। गुलामक़ादिर ने थोड़ी देर तक इस सेना का मुकाबला किया, पर जब देखा कि अब बचना कठिन है तो एक घोड़े पर चढ़ कर भाग निकला। लेकिन घबरा- हट में घोड़े से गिर पड़ा और बेहोश हो गया। गांव वालों ने उसे पहचान लिया और उसे मरहठों के पास ले आये। उस अधम को दंड देने के लिये मुसलमान-जनता जितनी लालायित थी उतना और कोई भी न था। वह शिन्दे के सामने लाया गया और गुलामक़ादिर को उन सब शत्रुताओं का बदला चुकाना पड़ा जो कि उसकी तीन पीढ़ी और शिन्दे के मध्य थीं। उसकी बड़ी दुर्दशा की गई और चूंकि अब भी वह गालियां देने से बाज न आता था इस लिये उसकी जीभ काट ली गई और आंखें फोड़ दी गईं। इस प्रकार निर्दयतापूर्वक सताये जाने के बाद नजीब का पोता मुगल बादशाह के पास भेज दिया गया, जिसकी इच्छा अपने