भारतकोश
हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar

विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा

DevanagariHindipublished254 पृष्ठ

पृष्ठ 193, कुल 254 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 193

[ १६५ ]

उसे असह्य हो गया। मुसलमान गांव-गांव और घर-घर घूमकर डींग मारते फिरते और कहा करते थे कि शीघ्र ही युद्ध होगा; जिसमें काफिर- शाही का अन्त होगा और पूना में मुसलमानी ध्वजा फहराएगी। निज़ाम का मन्त्री इतना ढीठ हो गया कि जब मरहठा रेजिडेण्ट ने उससे चौथ मांगी तो उसने उत्तर दिया कि नाना स्वयं हैदराबाद आवें और हमें बतलावें कि उन्हें "चौथ" लेने का क्या अधिकार है। फिर उसने कहा— "यदि नाना यहां स्वयं न आएगा तो मैं शीघ्र ही उसे यहां ले आऊँगा।" फिर यह सोच कर कि सम्भव है कि इतने ही अपमान करने पर मरहठे लड़ने को उद्यत न हों, निज़ाम ने एक बादशाही उत्सव किया जिसमें दूसरे देशों के भी राजदूत बुलाये गये थे। उन राजदूतों के समक्ष अपने दो दरबारियों को नाना और माधोराव पेशवा बना कर उनका हर प्रकार से परिहास किया गया। इस पर मरहठे राजदूत गोविन्दराव पिंगले और गोविन्दराव काले क्रोध भरे उठ खड़े हुये और निज़ाम के इस असभ्यता- पूर्ण कार्य का घोर विरोध और निन्दा की और अन्त में मरहठा वीर ने ललकार कर कहा, "ऐ मुशीरुलमुल्क ! तू ने कई बार अपनी शक्ति पर अभिमान करके नाना को नीचा दिखलाने का प्रयत्न किया और चाहा कि उन्हें हैदराबाद आने के लिये विवश करूं, किन्तु स्वयं अपमानित हुआ। इस बार भी तूने इस राजदरबार में हमारे स्वामी का अपने दरबारियों द्वारा अपमान कराया है। मैं आज ही ललकार कर कहे देता हूँ कि यदि मरहठे तुमको जीते पकड़ कर महाराष्ट्र की राजधानी में तमाशा बनाकर न घुमायें तो मेरा नाम गोविन्दराव नहीं।" यह कह कर मरहठे-राजदूत निज़ाम के दरबार से निकल कर पूना के लिये चल दिये और पूना पहुँच कर लड़ाई की घोषणा कर दी। अंग्रेज़ दोनों विपक्षियों के हितकारी बनने का ढोंग दिखाने के लिये सुलह कराने का प्रयत्न करने लगे; किन्तु मरहठों ने उन्हें डांट कर कह दिया कि महाराष्ट्र-के कार्यों में आप लोग कभी भी हाथ न डाला करें। इस भाव को जानकर अंग्रेज़ ऐसे भयभीत