भारतकोश
हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar

विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा

DevanagariHindipublished254 पृष्ठ

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हुये कि यद्यपि निज़ाम ने उनकी सहायता चाही, किन्तु अंग्रेजों ने देने का साहस न किया। निज़ाम ने लड़ाई की बड़ी तैयारी की थी। उसका मन्त्री बड़ी बड़ी डींगे मारता था और उसने कुछ मुसलमान मौलवियों को आज्ञा दे दी थी कि घूम-घूम कर यह प्रचार करो कि यह धार्मिक युद्ध है और इसमें भाग लेना प्रत्येक मुसलमान का परम कर्त्तव्य है। काफ़िरों का सत्यानास करके पूना को लूट कर जला देना हमारा परम धर्म है। वज़ीर मुशरुलमुल्क स्वयं कहा करता था कि मैं मुगलराज्य को मरहठों की पराधीनता से मुक्त करूँगा और इस बार नवयुवक पेशवा को भिक्षुक बना दूँगा, ताकि वह महाराष्ट्र छोड़ कर बनारस जाकर द्वार-द्वार भिक्षा मांगे। जबकि हैदराबाद का वज़ीर इस प्रकार की डींगें मारने में चूर हो रहा था, उस समय मरहठों का मन्त्री अपनी सेनाओं की गणना कर रहा था, और आक्रमण करने का उपाय सोच रहा था। यद्यपि उनके वीर सरदार और प्रधान सेनापति महादजी की मृत्यु हो गई थी, फिर भी मरहठों ने उस समय पूर्ण उत्साह दिखलाया। नाना की बुद्धि कभी इतनी प्रखर न हुई थी। अपने समाज के लोगों पर उसका जैसा अद्भूत प्रभाव इस बार दिखाई दिया पहले कभी देखने में न आया था। उसकी आज्ञा पर महाराष्ट्र की दूर देशों में फैली सेना, हिन्दू-पद-पादशाही के नाम पर पूना में एकत्रित होने लगी। महादजी का उत्तराधिकारी दौलतराव सींधिया, आगरे का रक्षक जीवादादा बख्शी, दूसरे सेनापति, और जो सेनायें उत्तरी भारतवर्ष में पठानों, रुहेलो और तुर्कों को आधीन किये हुए थीं, बुलाई गईं। तुकाजी होल्कर अपनी सेना के साथ वहां पर पहले से उपस्थित था। राघोजी भोंसला एक शक्तिशाली सेना लेकर नागपुर से चल पड़ा। गायकवाड़ भी बड़ौदा से चल कर पूना में आ पहुंचा। पटवर्धन, रास्ते, राजेबहादुर और विनचुरकर, घाटगे, च्यावन, डाफिले, पवार, थोराट आदि बहुत से सरदार और सेनापति इस स्थान पर एकत्रित हो गये। पेशवा