भारतकोश
हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar

विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा

DevanagariHindipublished254 पृष्ठ

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पृष्ठ 197

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के प्रण को पूरा किया। सज्जन मन्त्री और सर्व-प्रिय पेशवा ने शत्रु को यह दिखला दिया कि अगर वे चाहें तो उसे पूना के द्वार-द्वार घुमा सकते हैं। किन्तु उन्होंने उसका और अधिक अपमान करना उचित न समझा। नाना ने उसे क्षमा कर दिया। मरहठों ने यह दिखला दिया कि ये जिसे चाहें दण्ड दे सकते हैं, किन्तु वे बहुत लोगों को क्षमा ही कर दिया करते हैं। पेशवा ने सारे सेनापतियों के साथ बड़े धूमधाम और उत्सव के साथ अपनी राजधानी में प्रवेश किया। चारों ओर से मनुष्यों के झुंड-के-झुंड पूना में अपने पेशवा और बहादुर सैनिकों को बधाई देने के लिये आने लगे। पूना अपने विजयी सपूतों के स्वागत के लिये अति उत्तमता पूर्ण सजाया गया था। स्त्रियां बादशाही शहर के महलों की छतों झरोखों पर बैठी हुई विजयी शूरवीरों, सेनापतियों, राजनीतिज्ञों तथा अपने प्रिय पेशवा के ऊपर पुष्पों की वर्षा करती थीं। कुमारी कन्यायें तथा भद्र महिलायें, भक्ति और श्रद्धापूर्वक अपने २ द्वारों पर खड़ी होकर, अपने नवयुवक पेशवा की आरती उतारती थीं। अपनी राज्यभक्त और श्रद्धालु प्रजा द्वारा सम्मानित होता हुआ पेशवा अपने राजमहल की ओर बढ़ता गया। बहुत से सेनापति और सरदार- गण अपनी बड़ी बड़ी सेनायें लिये हुए, राजधानी के चारों ओर बहुत दिनों तक पड़े रहे। यह देखकर नाना के मन्त्रित्व और भाऊ के सेनापतित्व में हिन्दू-महा-राष्ट्र के दिनों की याद आने लगी। प्रिय पाठको! हम कुछ समय तक यहीं रुक जांय और अपने नवयुवक, भाग्यशाली और सुप्रसन्न पेशवा को अपनी प्रजा की अपार भक्ति और सर्वप्रियता का आनन्द लेने के लिये, बलवान् मन्त्रिगणों द्वारा जीते हुये राज्य को प्रजातन्त्र राज्य के उचित विभागों में विभाजित करके उनका सुप्रबन्ध करने के लिये, भविष्य कार्यक्रम बनाने के लिए, प्रान्तों के प्रतिनिधियों और सेनापतियों से परामर्श करने के लिये, महाराष्ट्र के निवासियों को विजय की प्रसन्नता पर आनन्द मनाने के लिये, भाट और