हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)
Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar
विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें[ २०० ] राज-कवियों को अपने पूर्वजों और सन्तानों के गुणगान जिनको सुनकर अब भी मनुष्य आनन्द से विह्वल हो जाता है किसानों को नाना के सुप्रबन्ध से प्रसन्न होकर अपने हलों के पीछे गाना गाने के लिये छोड़ दें ; और हम उन मन्दिरों के दृश्य को देखें जहां पर सहस्रों मनुष्य भेंट लेकर नाना प्रकार से पूजा करने के लिये एकत्रित हुये हैं और अपने पूजन में मग्न हैं, जहां देशों के भिन्न-भिन्न भागों के यात्री, संन्यासी, योगी, यती और वैज्ञानिक हरिद्वार से लेकर रामेश्वर तक, अपने- अपने कार्यों में निश्चित होकर संलग्न हैं और जहां धनी लोग शास्त्रों और वेदों के अध्ययन के प्रोत्साहन के लिये करोड़ों रुपये व्यय कर रहे हैं, जिससे अध्यापक और विद्यार्थी गुरुकुल और महाविद्यालयों में विद्याध्य- यन कराते और करते हैं, जहां सैनिक और मल्लाह लोग वीरतापूर्ण कहा- नियां अपनी प्यारी स्त्रियों और अपनी पूज्य माताओं को सुना रहे हैं और उन्हें अपने शौर्यपूर्ण कार्यों का समर्थन कराने के लिये शत्रुओं से लूट में पाये हुये हीरे जवाहरात और स्वर्ण को दिखा रहे हैं, सारा महाराष्ट्र स्वतन्त्र है और आनन्द के सागर में किल्लोल कर रहा है। पाठको ! हमें प्रजा को ऐसे आनन्द में ही छोड़ देना उचित है ताकि स्वतन्त्रता और राष्ट्र-महत्ता के फल का उपभोग कर सकें जोकि उन्होंने कई पीढ़ियों के अपार परिश्रम और प्रयत्नों से प्राप्त किया है। यद्यपि उसे परमात्मा ने यह ज्ञान दिया है कि सुख क्षणिक है, तथापि वह सदैव वैभव की चोटी पर रहना चाहता है। इसलिए जितने समय तक उन सुखों को वह भोग सकता है उसे भोग लेने देना चाहिए। अब हम, जो कुछ पहिले संक्षेप से महाराष्ट्र के वर्तमान इतिहास में लिख आये हैं, उसी का सिंहावलोकन करेंगे। हम महाराष्ट्र के इतिहास को भारत के इतिहास से सम्बन्धित करने की चेष्टा करेंगे और यह दिखाने का प्रयत्न करेंगे कि यह भारत के इतिहास का ही एक अंग है एवं उसका एक महत्वपूर्ण और मार्मिक अध्याय है।