हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)
Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar
विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा
पृष्ठ 200, कुल 254 में से
संदर्भ में पढ़ेंउसका एक अध्याय ही है, यद्यपि वह कितना ही महत्वशाली और शानदार है। इसलिए यह परमावश्यक था कि हम महाराष्ट्र के इतिहास का यथासंभव संक्षेप से वर्णन करते। इसके साथ यह भी जरूरी था कि हम उस मूलकारण, स्रोत तथा प्रेरक शक्ति को भी एक निश्चित रूप में प्रकट करते जिसमें कि प्रोत्साहित होकर सारी महाराष्ट्र जाति एक शक्तिशाली हिन्दू साम्राज्य स्थापित करने तक, संघर्ष तथा, प्रयत्न करती रही और अपने प्राणों की आहुतियां चढ़ाती रही। क्योंकि महाराष्ट्र प्रांत से बाहर वाले लोग महाराष्ट्र के इतिहास के प्रथम भाग से ही भली भांति परिचित हैं और उस भाग का, पिछले भाग की अपेक्षा, मान भी अधिक करते हैं—पिछला भाग बालाजी विश्वनाथ के प्रादुर्भाव तथा महाराष्ट्र-मण्डल की स्थापना से आरम्भ होता है। इसके विषय में लोग बहुत कम जानते हैं। रानाडे जैसे विद्वान् शिवाजी तथा : राजाराम के वंशजों के पूर्ण वृत्तान्त उनके वास्तविक रूप में पहले ही प्रकट कर चुके हैं। हमने भी प्रथम भाग की केवल दो चार घटनाओं का ही स्थूल दृष्टि से वर्णन किया है। दूसरे भाग का हमने विस्तार पूर्वक वर्णन किया है यद्यपि वह भी सम्पूर्ण नहीं कहा जा सकता। दूसरे भाग के आरम्भ होने के साथ ही महाराष्ट्र का इतिहास विशेष महाराष्ट्र का इतिहास नहीं रह जाता, वरन् वह इतना महत्वशाली बन जाता है कि उसे सारे भारतवर्ष का इतिहास मानना पड़ता है। पान-हिन्दु सिद्धांत की दृष्टि से महाराष्ट्र इतिहास का सिंहाव- लोकन करने, तथा उन सिद्धान्तों को, जिन सिद्धान्तों ने कि महा- राष्ट्रवासियों को पीढ़ी-दर-पीढ़ी प्रोत्साहित किये रखा—निश्चित रूप में प्रकट करने का जो हमने प्रयास किया है, उनके संबन्ध में हमने अपनी ओर से कुछ नहीं लिखा, अपितु उस आन्दोलन के संचालक विचारकों तथा कार्यकर्ताओं तथा उनके महान् उद्देश्यों से ही उसका समर्थन कराया है। इस आन्दोलन में सम्मिलित होनेवाले वीर मुख से कुछ न कह