भारतकोश
हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar

विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा

DevanagariHindipublished254 पृष्ठ

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[ ११ ] २. सब से उत्तम मार्ग "उपाधीचें काम ऐसें । काही साधे, काही नासे" —रामदास "कांहीं दिवस भयरहित सदोदित स्वराज्य चालविलें दरिद्र अटकेपार जनाचें ज्यानीं घालविलें जलचर हैदर नवाब इंग्रज रण करतां थकले ज्यानीं पुण्याकडे विलोकिले ते संपत्तीला मुकले —प्रभाकर यदि मरहठों ने, लोगों को भुजबल से अधीन करके प्रजातन्त्र- राज्य स्थापित करने की जगह, उनके सामने साम्य-भाव का आदर्श उपस्थित करके, एक ऐसा हिन्दू-साम्राज्य स्थापित करने का प्रयत्न किया होता, जो सर्वसाधारण हिन्दूमात्र के नाम से पुकारा जाता और जिसमें बंगाली, पंजाबी, मरहठा, राजपूत, ब्राह्मण और शूद्र आदि का भेद भाव उड़ा कर एकमात्र हिन्दुत्व की भावना पैदा की होती तो क्या इससे उनके स्वदेशानुराग का इससे अधिक परिचय न मिलता ? यदि विचार-पूर्वक देखा जाय तो वास्तव में यही असली प्रजातंत्र-राज्य होता और इसके द्वारा मरहठों की देशभक्ति और भी ऊंची समझी जाती। किंतु यदि हिंदुओं के भीतर इस प्रकार एकता के सूत्र में बंधने का गुण वर्तमान होता तो मुसलमान सिंध को कदापि पार न कर सकते । हमें प्रत्येक घटना को उसके वास्तविक रूप में देखना चाहिये और इस जाति ※ कठिन कार्य कुछ तो सफल हो जाते हैं और कुछ असफल भी रह जाते हैं। —रामदास थोड़े दिन तक भयरहित होकर अच्छी तरह से स्वराज्य चलाया, प्रजा की निर्धनता को अटक से पार भगा दिया। मकर के समान हैदर, नवाब और बड़े २ फरंगी लड़ते २ थक गये। जिन्होंने पूना की ओर ख्याल किया वे सम्पत्तिहीन होगये। —प्रभाकर

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