हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)
Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar
विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा
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ही महत्त्वपूर्ण और विजय पूर्ण नवीन युग का प्रारंभ हो गया। जिन घटनाओं का हमने वर्णन किया है, उनसे यह स्पष्ट हो जाता है कि जिस प्रकार मरहठों की यह नवीन युद्धकला वास्तव में ही युद्ध विज्ञान में एक नया आविष्कार था उसी प्रकार महाराष्ट्रधर्म भी मृतप्राय हिन्दू जाति की नष्ट होती हुई आत्मा मे नवजीवन का संचार करने वाला सिद्ध हुआ। निश्चय रूप से उस समय की परिस्थितियों में यह नवीन युद्धकला महाराज शिवाजी के लिये परमोपयोगी सिद्ध हुई और उसका विकास भी मानो उन्हीं परिस्थितियों के परिणाम स्वरूप हुआ था। शिवाजी के वंशजों ने भी उन्हीं ढंगों को अपनी बुद्धि के अनुरूप पाया और उनमें लचीला- पन अनुभव किया। अत जिन्हें शिवाजी मुट्ठी भर आदमियों को लेकर प्रयोग किया करते थे और बड़ी २ सेनाओं को परास्त किया करते थे उन्हें ही वे अब बड़ी २ सेनाओं के स्वामी होकर भी प्रयोग में लाते थे और विजय प्राप्त करते थे। शिवाजी और गुरु रामदास द्वारा आविष्कृत इस नवीन युद्धकला को उनके उत्तराधिकारी सेनापतियों ने और भी विशाल रूप दिया और बड़ी २ सेनाओं के अधिपति होने पर भी उन्होंने उन्हीं युद्ध कलाओं को सफलतापूर्वक प्रयोग किया जिसके फलस्वरूप शत्रु उनके सामने न ठहर सका। मरहठों की सेनायें शत्रुओं की बड़ी-बड़ी सेनाओं को देख कर तितर-बितर हो जाया करती थीं और पास के पहाड़ों और जंगलों मे लुक-छिपकर उनका परीक्षण किया करती थीं। इसको देखकर शत्रु यह समझ लिया करते थे कि मरहठे डर कर भाग गये हैं और उनका सामना करने में सर्वथा असमर्थ हैं अतः वे प्रसन्नता से आगे बढ़ते जाते थे। अन्त मे वे ऐसी जगह जाकर फंस जाते थे कि जहां से उनका निकलना असम्भव हो जाता था और कभी-कभी तो वे ऐसी जगह पर पहुंच जाते थे कि जहां पर मरहठे उन्हें घेरना अपने लिये अत्यन्त लाभदायक समझते थे। ऐसी दशा उपस्थित हो जाने पर मरहठे बड़ी चतुराई से अपना