हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)
Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar
विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें[ २३ ] शिवाजी के एक अपूर्व शक्तिशाली पुरुष होने का मुख्य कारण यह था कि उनके सजातीय लोग आजन्म उनका साथ देते रहे, उनके साथ सर्वदा सहानुभूति रखते आये और जिस कार्य को शिवाजी लेकर कार्यक्षेत्र में उतरे, उसको सफल बनाने के लिये तनमन से प्रयत्न करते रहे तथा उनकी प्रबल आशा और इच्छा को समयानुकूल प्राणपण से पूर्ण करते रहे। इस प्रकार हमें आगे चलकर यह अवश्य मानना पड़ेगा कि महाराष्ट्र का इतिहास शिवाजी के मृत्युकाल से प्रारम्भ होता है। शिवाजी ने अपने जीवन काल में एक छोटे से प्रदेश की नींव डाली थी, पर उसका विशाल राज्य में परिणत करने का काम उनके उत्तराधिका- रियों का था, जिसकी पूर्ति, महाराज के परलोकवासी होने के हुई, या यों कहना उपयुक्त होगा कि महाराष्ट्र के वीर रस प्रधान इतिहास का आरम्भ उस समय हुआ जब कि शिवा जी हिन्दू जाति में * शक्तियां उत्पन्न करने के पश्चात् परलोकवास कर गये। ये शक्तियां उनके पश्चात् बड़े वेग से काम करती रही। ———— ४. "धर्मासाठीं मरावे" * —रामदास महाराष्ट्र धर्म, और इस धर्म के द्वारा महाराष्ट्र में हिन्दुओं के पुनरुद्धार के आन्दोलन में भरी हुई शक्ति के विषय में औरंगजेब ने जो अनुमान लगाया था वह अक्षरशः असत्य निकला। उसका विचार था कि जैसे अनेकों दूसरे आन्दोलन अपने नेताओं की मृत्यु के पश्चात् समाप्त होजाते हैं उसी प्रकार इस आन्दोलन का भी शिवाजी की मृत्यु के बाद अन्त हो जायगा, विशेषकर ऐसी अवस्था में जब कि उनका उत्तराधिकारी उनका अयोग्य-पर वीर-पुत्र संभाजी बना। इसलिए औरंगजेब ने ऐसे अवसर ——————————————————————————————
- धर्म के लिये मरो।