हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)
Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar
विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा
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आरम्भ कर दिया। पत्र में उसे यह भली भांति समझाया गया कि आप राजाराम से आकर मिल जायें तो हम लोग अनायास मुग़ल का जिनजी में सत्यानास कर सकते हैं। दूसरे यह आपका कर्तव्य भी है कि आप मरहठों की सहायता करें जो कि अपने के धर्म और देश की रक्षा करने का प्रयत्न कर रहे हैं। वीर नागोजी राजा ने मरहठों की उक्त प्रार्थना को स्वीकार लिया और एक हिन्दू के नाते, अपना उचित कर्तव्य समझ, पांच सहस्र अनुयायियों के साथ मुसलमानी फ़ौज से निकलकर मरहठों से आ मिला। इसके पश्चात् खण्डोपलाल ने शिर्का को भी, जो कि अभी तक मुग़लों की ओर ही था, मरहठों की ओर मिला लेने का दृढ़ निश्चय किया। परन्तु जब शिर्का ने पत्र में पढ़ा कि राजाराम बड़ी आपत्ति में फंसा हुआ है, तो संभाजी द्वारा अपनी जाति पर किये गये अत्याचारों का स्मरण करके वह अति क्रोधित हो गया और पत्रोत्तर में उसने लिखा कि एक राजाराम ही क्या, यदि सारा भोंसला खानदान भी इस पृथ्वी से मिट जाये तो भी मुझे इसकी तनिक चिन्ता न होगी। क्या वह दिन भूल गये, जब शिर्का लोग संभाजी का निशाना बन रहे थे और जहां कहीं पाये जाते, मार डाले जाते थे? मुझे उन दिनों का स्मरण करके अत्यन्त दुःख होता है। मैं तो भोंसलों के उन बुरे दिनों की प्रतीक्षा कर रहा हूं, जिन्हें देख कर मुझे शान्ति प्राप्त होगी। इस प्रकार का पत्रोत्तर पाकर खण्डोबालाल तनिक भी हतोत्सा- हित न हुआ और अपने विचार द्वारा पुनः प्रार्थना पत्र भेजकर उसने समझाया कि 'ऐ मेरे प्रिय मित्र! सुनिये, आपका लिखना अक्षरशः सत्य है, पर यह बात भी तो सत्य है कि संभाजी ने केवल आप ही की जाति पर अत्याचार नहीं किया था वरन् हमारे परिवार के तीन व्यक्तियों को भी हाथी के पैरों तले कुचलवा दिया था। उसकी चोट मेरे हृदय को उतना ही कष्ट पहुंचा रही है, जितना आपके हृदय को। पर इस समय की समस्या