हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)
Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar
विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा
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किसी परिवार-विशेष से सम्बन्ध नहीं रखती और न ही हम लोग अपने स्वार्थ के लिये लड़ रहे हैं; न हम लोगों का उद्देश्य भोंसला या किसी और ही कुल को ऊंचा करने का है; वरन् हमतो एक हिन्दू प्रजातन्त्र- राज्य के हेतु प्राण दे रहे हैं- "हिन्दूच्या साम्राज्यासाठीं आम्ही झटत आहों !" ॐ शिर्का का हृदय खान्डोवलाल के पत्रोत्तर से द्रवित हो गया और उसकी जातीय भावनायें उद्बुद्ध हो गई । उसके सामने जाति का गौरव नाचने लगा और वह इस जातीय अपील से प्रभावित हुए बिना न रह सका । उसने व्यक्तिगत अपराधों और पारिवारिक झगड़े को भूल कर क्षमा प्रदान की । राजाराम को घिरी हुई मुगल सेना से छुड़ाने का वचन दिया और अपने वचनानुसार अनेक प्रकार की सहायता देकर राजाराम को मुगल सेना से मुक्त कराकर तथा विजेता के रूप में महाराष्ट्र पहुंचा दिया । इस प्रकार केवल शिवाजी के पुत्र का ही नहीं, वरन् उनके पश्चात् उनके वंशजों का भी हृदय देशभक्ति के उच्च भावों से भरा हुआ था । हिन्दू जाति की राजनैतिक स्वतन्त्रता तथा धर्मरक्षा का पवित्र ध्येय सर्वदा उनके हृदय में विराजता था, इसी कारण वे विदेशी और असभ्य शत्रुओं के भयंकर आक्रमण से सदा सचेत रहकर अपने प्राण हथेली पर रखकर, हिन्दू धर्म की रक्षा करते रहे । अब आप स्वयं सोच सकते हैं कि क्या लुटेरे और बटमार भी ऐसे पराक्रमी शत्रुओं पर युद्ध में विजय प्राप्त कर सकते थे ? कदापि नहीं ! इस प्रकार सफलता प्राप्त करना उन सच्चे धर्मवीर मरहठों का ही काम था । यह धार्मिक वा जातीय शक्ति का ही प्रताप था जिसने उस समय के देशभक्तों को बहुत शक्तिशाली बना दिया और उन्हें देश को ऐसे खतरे से सुरक्षित रखने के योग्य बना दिया जिस का मुक़ाबला देश की कोई दूसरी शक्ति न कर सकती थी । ॐ हिन्दुओं के साम्राज्य की स्थापना के लिए हम प्रयत्न कर रहे हैं।