भारतकोश
हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar

विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा

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करने लगे कि वास्तव में मरहटों का यह आन्दोलन प्रान्तीय या व्यक्ति- गत नहीं है, वरन् धार्मिक और सार्वजनिक है। इस कारण वहां के हिन्दू, जिनके नैसर्गिक नेता वहां के जमींदार, ठाकुर और उनके पुरोहित थे, उक्त आंदोलन के पक्षपाती हो गये और इस कार्य को सब ने अपना मुख्य कर्त्तव्य समझ लिया। उनमें मरहटों के प्रति श्रद्धा उत्पन्न हुई और उन्हें पूर्णरूप से ज्ञान हो गया कि मरहटों की यह विशाल शक्ति ही केवल देश और धर्म को विदेशियों के पंजे से मुक्त कराने का उस समय एकमात्र सर्वश्रेष्ठ साधन है। भाग्यवश मालवा के हिन्दुओं को वहां प्रसिद्ध तथा प्रभावशाली राज- कुमार मिला हुआ था जो कि हिन्दू-स्वतन्त्रता का बहुत ही समर्थक था। उसका शुभ नाम सवाई जयसिंह था। था वह जयपुर का राजा। महा- राज छत्रसाल ने जब अनुभव किया कि हम अपने छोटे से राज्य को विदेशियों के आक्रमण से रक्षा करने में पूर्णतया असमर्थ हैं तो उन्होंने देशभक्ति से प्रेरित होकर तथा प्रान्तीय भेदभाव को त्याग कर हिन्दू स्वतन्त्र राज्य के आन्दोलन से सहानुभूति रखना पसन्द किया और इस बात की परवाह नहीं की कि इस आन्दोलन के जन्मदाता कौन हैं। चाहे मरहठे हों या राजपूत हों, चाहे भिल अथवा कोई अन्य हिन्दू सम्प्रदाय क्यों न हो, उन्होंने दिल्ली के 'मुसलमानी राज्य के सामने सिर झुका कर जीना पसन्द नहीं किया। वह इसी विचार पर अटल भी रहा। छत्रसाल के इसी उत्तम विचार का अनुकरण जयसिंह ने भी किया। जयसिंह ने बड़ी वीरता के साथ मालवानिवासी पीड़ित हिन्दुओं का पक्ष ग्रहण किया। वे क्षत्रिय, ब्राह्मण तथा अन्य जातिवाले मुसलमानों द्वारा नियुक्त शासकों के अन्यायपूर्ण करों से पीड़ित हो रहे थे। वे लूटमार तथा अपने जाति और धर्म की अवनति तथा अपमान से विह्वल हो रहे थे। यह सब कुछ सहन करना उनकी शक्ति से बाहर हो रहा था। उन सबको जयसिंह ने अपने पास बुलाकर अपनी सम्मति दी कि सभी