हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)
Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar
विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा
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बना लिया । इसी कारण इसकी सारी प्रजा इसको 'हिन्दू-धर्म की ढाल' के नाम से बुलाने लगी थी । मुहम्मद बंगश ने एक बड़ी भारी सेना के साथ बुन्देलों के छोटे से राज्यपर, बादशाह की आज्ञानुसार, आक्रमण कर दिया । वृद्ध बुन्देले सरदार ने जब देखा कि मुझ जैसे छोटे राज्य को विध्वंस करने की शाही-आज्ञा लहर मार रही है तो वह कुछ चिन्तित हुआ । पर शिवाजी जैसे गुरु तथा रामदास और प्राणनाथ प्रभु जैसे महात्माओं की हिन्दू-पद- पादशाही की शिक्षाओं से पूर्णतया प्रभावित छत्रसाल का ध्यान अपने गुरुभाई बाजीराओं की ओर गया । बाजीराओ के रक्त में न केवल शिवाजी का उत्साह ही भरा हुआ था बल्कि उनमें अपने पूर्वजों के उद्देश्य की पूर्ति की लगन भी लगी हुई थी । छत्रसाल ने एक करुणा-पूर्ण पत्र बाजीराओ के नाम लिखा, जिस में उनके पूर्वजों की कीर्ति तथा उच्च ध्येय का दिग्दर्शन कराते हुए उनके कर्त्तव्यों का स्मरण दिलाया और अपनी इस संकटापन्न अवस्था में सहायता पाने के लिये प्रार्थना की । छत्रसाल की बुद्धिमत्ता तथा लेखन-शक्ति ऐसी थी, कि उसके इस पत्र ने प्रत्येक हिन्दू के हृदय में भ्रातृभाव उत्पन्न कर दिया । मैं उसके पत्र का सार अंकित करता हूं, जो उसकी श्रद्धा का द्योतक है। “जिस प्रकार विष्णु भगवान् ने गजराज के आर्तनाद को सुनकर नंगे पावों जाकर दुष्ट ग्राह के हाथ से उसकी रक्षा की थी उसी प्रकार “ऐ हिंदू-कुल-कमल-दिवाकर बाजीराओ ! आप भी आइये और मुझ दीन को विधर्मियों के भयंकर आक्रमण से बचाइये ।” महाराज शिवाजी के एक पुराने शिष्य तथा मित्र के इस प्रकार मुसलमानों के आक्रमण द्वारा धर्मसंकट में पड़ने परतथा एक हिन्दू के नाते मरहठों से सहायता मांगने पर भला मरहठे इसकी पुकार को कैसे अन- सुना कर सकते थे । उनका तो अस्तित्व ही धर्म की रक्षा के लिए था । पत्र पाते ही मरहठों का उत्साह देशभक्ति के लिये उबलने लगा और तत्काल