भारतकोश
हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)

Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar

विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा

DevanagariHindipublished254 पृष्ठ

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पृष्ठ 53

[ ५३ ] ९. हिन्द-सागर की ओर ❄ आरमार स्वतन्त्र एक राज्यांगच आहे. ज्याचे जवळ आरमार त्याचा समुद्र... जलदुर्गवेष्टित होते त्यास नूतनच जलदुर्ग करून पराभविले”। —रामचन्द्र पन्त आमात्य—राजनीति । भारत-भूमि को स्वतन्त्र करने के लिये, जिस समय मरहठे मुगल-राज्य के ठीक केन्द्र में लड़ाई छेड़े हुए थे, उसी समय हिंद- महासागर को भी विदेशियों से स्वतन्त्र कराने के लिये प्रयत्नशील थे; क्योंकि उन का अनुमान था कि जैसे मुसलमान स्थल के अधिपति हो कर हिन्दू राज्य के लिये जितने बाधक हो रहे हैं वैसे ही युरोपीय सौदागर भी, जिन के जहाज़ इस समय व्यापार के लिए हिन्द-महासागर में आ जा रहे हैं, भारत के अधिकारी होकर उतने ही बाधक सिद्ध होंगे । शिवाजी तथा उन के वंशज युरोपीय सौदागरों की कामना, आशा तथा लोभ का नाश करने तथा उन के कार्य को असफल बनाने मे किस प्रकार दत्तचित्त थे—इस का पूरा दिग्दर्शन, प्रसिद्ध नेता और राजनीतिज्ञ रामचन्द्र पंत के बनाए तथा मरहठा मंत्रिमंडल द्वारा लोगों का ज्ञान बढ़ाने के लिये प्रकाशित “स्टेट-पॉलिसी” नामक ग्रन्थ के पढ़ने से होता है । शिवा जी समयानुकूल अपनी वीरता से यथाशक्ति समुद्रतट की विदेशियों से रक्षा करते रहे । यहां तक कि उन्हों ने केवल हिन्द- ❄ स्वतन्त्र सामुद्रिक बेड़ा राज्य का एक आवश्यक अंग है । जिस के पास सामुद्रिक बेड़ा होता है वही समुद्र का स्वामी बन सकता है । जिन शत्रुओं के पास जलदुर्ग हैं उनको हराने के लिए नवीनतम जलदुर्गों की आवश्यकता होती है ।