हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)
Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar
विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें[ ५६ ] सैनिकों ने किले की दीवार को पार करने के लिये अनेकों प्रयत्न किये, पर दीवार से लगी हुई तोपों ने उनके सारे प्रयत्नों को निष्फल कर दिया। इस प्रकार अपनी हार होते देखकर गोरे बहादुर अत्यन्त क्रोधित होउठे और जी खोल कर लड़े। पर वाह रे मरहठे बीरो ! तुम ने उनकी सारी आशाओं को धूल में मिला कर उन्हें पीछे हटा दिया । जब अंगरेज़ों के पांव रणक्षेत्र से उखड़ गए, तब मरहठे अपनी सारी शक्तियों को लगा कर अन्धाधुन्ध गोले बरसाने लगे, इस से अङ्गरेज़ सिपाहियों ने जितनी शीघ्रता से किले पर आक्रमण किया था उन से भी अधिक शीघ्रता भागने में दिखाई। दूसरे साल, गवर्नर बून ने पुनः पूरी तैयारी के साथ खाण्डेरी द्वीप पर आक्रमण किया, पर फिर भी उसे मरहठों से पराजित होकर भागना पड़ा। इस प्रकार मरहठों की वीरता ने उन्हें ऐसा नीचा दिखाया कि उनके हृदय में उन का डर बैठ गया, इस पर गवर्नर ने इङ्गलैण्ड के राजा का पत्र द्वारा एक पूर्ण जहाज़ी बेड़ा तैयार करने के लिये विवश किया। बून के कथनानुसार इङ्गलैण्ड के राजा ने प्रसिद्ध सेनापति कोमोडोर मैथ्यू की अध्यक्षता में एक बड़ा भारी जंगी बेड़ा, जिस के साथ चार अन्य जंगी जहाज़ थे, रवाना किया और साथ ही साथ मरहठों पर विजय पाने के लिये पुर्तगीज़ों को भी युद्ध के लिये निमन्त्रित किया। इस सुअवसर को पाकर पुर्तगेज़ भी बड़ी प्रसन्नता के साथ मरहठों के विरुद्ध लड़ाई करने के लिये चल पड़े। सन् १७२१ ईस्वी में मरहठों को इस युरोप की मिश्रित शक्तियों ने सामना करने के लिये उठना पड़ा और वे ऐसी बुद्धिमानी और वीरता