हिन्दू पद-पादशाही (मराठा साम्राज्य एवं हिन्दू पुनरुत्थान इतिहास)
Hindu Pad-Padashahi by Veer Savarkar
विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) द्वारा
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के पश्चात् तो किले में प्रविष्ट हो जाऊँ।” ऐसी अदम्य वीरता भरे शब्दों ने उन योद्धाओं में जोश भर दिया। वे सिर धड़ की बाज़ी लगा कर रणक्षेत्र में कूद पड़े। मानाजी आंगरे, मल्हगराओ होलकर, राणोजी शिंदेगाव एक दूसरे से पहले किले की दीवारों तक पहुँचने की कोशिश करने लगे। इस समय एक और खंदक भक से उड़ गई। मरहठे अदम्य साहस के साथ आगे बढ़े और खण्डहरों में जाकर डट गए। पूर्तगेज़ों की अपूर्व वीरता उन्हें अपने मोर्चों से पीछे न हटा सकी। पुर्तगेज़ अब अधिक समय तक मरहठों के सामने न ठहर सके और उन्होंने हथियार डाल दिये। मरहठों का गेरुवा झंडा हिन्दू धर्म और हिन्दू जाति के उत्पीड़िकों के ऊपर फहराने लगा। उसे बसीन के ऊपर गाड़ दिया गया। आकाश हिन्दू-धर्म के जयकारों से गूंज उठा।” अब सारा ही कोंकण प्रदेश स्वतंत्र हो चुका था। इस के पश्चात् कभी पुर्तगेज़ सिर न उठा सके। परन्तु वे गोवा में उपद्रव खड़े करते रहे। उनका वहां भी नाश कर दिया जाता पर मरहठों को इससे और अधिक महत्वपूर्ण कार्य करने थे इसलिए उन्होंने इस ओर विशेष ध्यान नहीं दिया। मरहठों ने समुद्र तथा पृथ्वी द्वारा आक्रमण कर के पुर्तगेज़ों की शक्ति को, जो कभी एशिया के समुद्रों में गुडहोप अंतरीप से लेकर पीले-समुद्र तक अकंटक राज्य भोगती थी—नष्ट भ्रष्ट कर दिया। इसके पश्चात् उन्हें कभी हिन्दुओं के विरुद्ध हाथ उठाने का साहस नहीं हुआ। अब अनुमान कीजिये कि उन हिन्दुओं के मन में कितनी प्रस- न्नता भर गई होगी। इन विदेशियों से छुटकारा पाकर उन्होंने कितनी शान्ति का अनुभव किया होगा। जो कभी विदेशियों द्वारा शासित किये जाते थे, जिनका यह दृढ़ विश्वास हो गया था कि वे सदा शासित किये जाने के लिए ही उत्पन्न हुए हैं अब जब कि उन महाराष्ट्र वीरों ने उनके दुश्मनों को मार २ कर भगा दिया तो वे राष्ट्रीय गौरव और विजय गर्व से फूले न समाते थे। कई शताब्दियों से पुर्तगेजी-